बस्ती: फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट दिखाकर CSP संचालकों को ठगने वाले दो शातिर गिरफ्तार, अर्टिगा कार और मोबाइल बरामद

अजीत मिश्रा (खोजी)
फोनपे और गूगल पे के फर्जी ‘पेमेंट सक्सेसफुल’ मैसेज से लगाते थे चूना, अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश
- बस्ती पुलिस की सख्त चेतावनी: सिर्फ स्क्रीनशॉट देखकर न दें कैश, खाते में बैलेंस कंफर्म होने के बाद ही करें लेन-देन
बस्ती के ग्राहक सेवा केन्द्रों (CSP) पर फोनपे और गूगल पे जैसी यूपीआई ऐप के फर्जी ‘पेमेंट सक्सेसफुल’ स्क्रीनशॉट दिखाकर कैश ठगने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से वारदात में प्रयुक्त एक अर्टिगा कार, चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 20 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं।
यह कार्रवाई एसपी डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के दिशा-निर्देशन और क्षेत्राधिकारी साइबर कुलदीप यादव के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक साइबर क्राइम विजय नारायन मिश्रा की टीम ने 11 सितंबर 2026 को की है।
कैसे खुला मामला और दर्ज हुआ मुकदमा
2 सितंबर 2026 को कोतवाली थानाक्षेत्र के अस्पताल चौराहा निवासी वादी सुनील कुमार गुप्ता ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी दुकान पर विशाल नाम का एक युवक आया था। उसने YONO SBI के QR कोड पर पैसे भेजने का ‘पेमेंट सक्सेसफुल’ होने का एक फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाया और उसके एवज में 9,090 रुपये नकद ले लिए। जब बाद में उन्होंने अपना बैंक खाता चेक किया, तो उसमें एक भी रुपया नहीं आया था।
इस शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम में मु0अ0सं0-22/2026 के तहत धारा 318(4), 319(2), 61(2) BNS एवं 66D IT Act के तहत मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की थी।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण
साइबर थाने की टीम ने सर्विलांस और मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए दो शातिरों को दबोचा:
- विशाल कुमार चौधरी पुत्र अजय चौधरी, निवासी- लधौरा, थाना मंगलौर, जनपद हरिद्वार (उत्तराखंड), उम्र 31 वर्ष।
- रिषभ सिंह भदौरिया पुत्र विजय पाल सिंह भदौरिया, निवासी- करौली सरकार, थाना सेन पश्चिम पारा, जनपद कानपुर देहात, उम्र 21 वर्ष।
ठगी का नया पैंतरा और पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे मुख्य रूप से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संचालित CSP (ग्राहक सेवा केंद्र) व जनसेवा केंद्रों को निशाना बनाते थे। वे दुकान पर जाकर कहते थे कि QR कोड पर पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं, कमीशन काटकर नकद पैसे दे दीजिए। इसके बाद वे अपने मोबाइल में पहले से तैयार किया गया फर्जी पेमेंट रिसिप्ट का स्क्रीनशॉट दिखा देते थे। जब तक दुकानदार अपना खाता खोलकर तस्दीक करता, तब तक वे रकम लेकर रफूचक्कर हो जाते थे।
पुलिस पूछताछ में इन शातिरों ने उत्तर प्रदेश के इटावा के काशीरामपुर में 8,080 रुपये और फिरोजाबाद में 1,01,000 रुपये की ठगी की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है। मुख्य आरोपी विशाल का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है, जो इससे पहले 22 मार्च 2024 को मुजफ्फरनगर में 20 हजार रुपये की ठगी के मामले में जेल जा चुका है।
बस्ती पुलिस की आम नागरिकों और CSP संचालकों से अपील
घटना के खुलासे के बाद साइबर थाना पुलिस ने जनपदवासियों और दुकानदारों के लिए एक व्यापक सुरक्षा सलाह जारी की है, ताकि लोग इस प्रकार की धोखाधड़ी से बच सकें:
- स्क्रीनशॉट नहीं, बैलेंस देखें: किसी भी ग्राहक के दिखाए स्क्रीनशॉट पर आँख मूंदकर भरोसा न करें। अपने बैंक खाते में मैसेज आने या आधिकारिक यूपीआई ऐप का बैलेंस चेक करने के बाद ही सामान या नकद राशि दें।
- जल्दबाजी के झांसे में न आएं: ठग अक्सर यह कहकर दबाव बनाते हैं कि “जल्दी में हैं, बाद में चेक कर लेना”। ऐसी हड़बड़ी में बिल्कुल न आएं, दो मिनट का समय देकर खाता जरूर जांच लें।
- QR कोड की वास्तविकता समझें: QR कोड हमेशा भुगतान ‘लेने’ के लिए होता है, ‘देने’ के लिए नहीं। यदि कोई कहे कि QR स्कैन करने पर पैसे आएंगे, तो वह शत-प्रतिशत फ्रॉड है।
- अनजान ऐप्स से तौबा: अपने फोन में कभी भी AnyDesk या TeamViewer जैसे स्क्रीन शेयरिंग ऐप या अनजान APK फाइल डाउनलोड न करें।
- CSP संचालक रखें विशेष सावधानी: दिनभर में सैकड़ों ग्राहक आते हैं। एक अलग रजिस्टर मेंटेन करें और खाते में धनराशि जमा होने की पुष्टि के बाद ही कैश बुक में प्रविष्टि करें।
- घटना होने पर तुरंत करें शिकायत: यदि दुर्भाग्यवश कोई ठगी का शिकार हो जाता है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते पैसे फ्रीज किए जा सकें। इसके अलावा नजदीकी साइबर थाने को भी सूचना दें।
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