चंद्रपुर: नांदगांव खदान में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल, 4 दिन में दो बड़ी घटनाएं

समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
चंद्रपुर परिसर स्थित नांदगांव भूमिगत कोयला खदान में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। पिछले चार दिनों के अंदर एक के बाद एक दो बड़ी घटनाओं ने खदान प्रबंधन की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। विषाक्त गैस रिसाव के बाद अब खदान के अंदर बड़े पैमाने पर कोयला धंसने की घटना सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 8 सितंबर की पहली शिफ्ट के दौरान खदान के 14वें स्तर के 29वें डिप (गहराई वाले हिस्से) में अचानक कोयला धंस गया। बताया जा रहा है कि इस हादसे में लगभग 40 से 50 टब कोयला भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त उस जगह पर कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था, वरना यह घटना एक बड़े जानलेवा हादसे में बदल सकती थी।
*4 दिन पहले हुआ था जहरीली गैस का रिसाव*
इससे महज कुछ दिन पहले ही नांदगांव खदान के 19वें लेवल के पास 28वें डिप में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का उच्च स्तर पाया गया था। गैस का प्रमाण बढ़ने से परिसर में धुंध जैसा वातावरण बन गया था। उस समय मौके पर मजदूर भी मौजूद थे। प्रबंधन से उम्मीद थी कि इस गंभीर घटना के बाद सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जाएगी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद कोयला धंसने की दूसरी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर फिर से सवाल खड़ा कर दिया है।
*सैकड़ों मजदूरों की जान जोखिम में*
इन लगातार घटनाओं से खदान में काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर मजदूरों की मौजूदगी में इतना बड़ा कोयला धंसता तो क्या होता? भूमिगत खदान में अचानक इतने बड़े पैमाने पर कोयला गिरने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। घटना के समय मजदूरों का वहां न होना भले ही राहत की बात हो, लेकिन इसे सुरक्षा प्रणाली की सफलता नहीं कहा जा सकता।
एक ही खदान में कम समय में कार्बन मोनोऑक्साइड का बढ़ना और बड़े पैमाने पर कोयला गिरना, यह दर्शाता है कि खदान में नियमित निरीक्षण, गैस मॉनिटरिंग, छत और कोयला संरचना की स्थिरता की जांच कितनी गंभीरता से की जा रही है।
*निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग*
अब मांग उठ रही है कि दोनों घटनाओं की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। गैस और कोयला गिरने के पीछे के असली कारणों का पता लगाया जाए और यह भी जांचा जाए कि हादसे से पहले और हादसे के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों (SOP) का पालन किया गया था या नहीं।
नांदगांव खदान प्रबंधन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ कोयला उत्पादन बनाए रखना नहीं, बल्कि मजदूरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। अगर इन घटनाओं से सबक लेकर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आज टला हुआ हादसा कल एक बड़े हादसे में तब्दील हो सकता है।
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