हरितालिका तीज आज, अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनें रखेंगी निर्जला व्रत

भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर महिलाएं मांगेंगी सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद, तीज व्रत की कथा सुनने को उमड़ेंगी श्रद्धालु महिलाएं
दुद्धी/सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_सुहाग, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना का पावन पर्व हरितालिका तीज आज श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर निर्जला व्रत रखेंगी। महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को विधि-विधान से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद हरितालिका तीज की कथा सुनकर पति के मंगल एवं अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी।
तीज को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह है। घरों में पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। महिलाएं नए वस्त्र एवं आभूषण धारण कर हाथों में मेहंदी रचाएंगी और सोलह श्रृंगार करेंगी। पूजा के दौरान माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से तीज की कथा का श्रवण भी करेंगी।
भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने रखा था कठोर व्रत
पौराणिक मान्यता के अनुसार हरितालिका तीज की कथा माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह से जुड़ी है। कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की थी।
मान्यता है कि माता पार्वती ने अपने पूर्व जन्म में भी भगवान शिव को पति रूप में पाने की इच्छा की थी। अगले जन्म में हिमालयराज की पुत्री के रूप में जन्म लेने के बाद भी उनका मन भगवान शिव में ही लगा रहा। माता पार्वती भगवान शिव को अपना पति बनाना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता हिमालयराज उनकी इच्छा से अनजान थे।
एक समय नारद मुनि हिमालयराज के पास पहुंचे और भगवान विष्णु से माता पार्वती का विवाह करने का प्रस्ताव रखा। हिमालयराज ने इसे स्वीकार कर लिया। जब माता पार्वती को इस बात का पता चला तो वह अत्यंत दुखी हुईं, क्योंकि वह मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थीं।
माता पार्वती की सखी उन्हें घने वन में ले गईं, ताकि उनका विवाह भगवान विष्णु से न हो सके। इसी कारण इस व्रत को हरितालिका कहा जाता है। ‘हरितालिका’ शब्द में ‘हरित’ का अर्थ हरण करना और ‘आलिका’ का अर्थ सखी माना गया है।
वन में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या शुरू कर दी। उन्होंने अन्न-जल का त्याग कर भगवान शिव की आराधना की। भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन माता पार्वती ने बालू और मिट्टी से भगवान शिव का शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा की। उन्होंने रात्रि में जागरण करते हुए भगवान शिव का ध्यान किया।
माता पार्वती की कठोर तपस्या और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी मनोकामना पूर्ण करने का वरदान दिया। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ। तभी से इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अपने पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।
तीज व्रत में शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार हरितालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित युवतियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं।
पूजा के दौरान महिलाएं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री, वस्त्र, फल-फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करती हैं। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, फल और जल अर्पित कर विधिवत पूजन किया जाता है। इसके बाद तीज व्रत की कथा सुनकर आरती की जाती है।
हरितालिका तीज केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में नारी के प्रेम, समर्पण और पारिवारिक मंगलकामना का भी प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं एक-दूसरे को तीज की बधाई देती हैं और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना करती हैं।
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