गडचिरोली का वाली कौन? सरकार के दावों की खुली पोल, पुल ढहे, माँ-बच्चे मर रहे, और सरकार जाँच-जाँच खेल रही है

गढ़चिरौली से वंदे भारत LIVE TV NEWS के लिए ब्यूरो चीफ समीर वानखेड़े की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
महाराष्ट्र का गडचिरौली… जिसे सरकार स्टील हब बनाने का सपना दिखाकर वाहवाही लूट रही है, उसी जिले में आज सरकार की नाकामी, भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता की इबारत लिखी जा रही है। करोड़ों के पुल कागज की तरह ढह रहे हैं, माताएं और नवजात दम तोड़ रहे हैं, और सरकार? सरकार सिर्फ एक ही काम कर रही है – *जाँच समिति बनाओ, मामला दबाओ!*
तीन साल में ही भरभरा कर गिरा करोड़ों का पुल, ये विकास है या लूट?
– भ्रष्टाचार का स्मारक बना कोठी-कोरणार पुल: एटापल्ली तालुका का कोठी-कोरणार पुल, जिसका खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़े-बड़े दावों के साथ उद्घाटन किया था, महज तीन साल में ही धराशायी हो गया। सोचिए, जो पुल मूल बजट से दोगुनी लागत में बना हो, वो तीन साल भी न टिके तो इसमें कितना माल खाया गया होगा? यह विकास नहीं, जनता के टैक्स के पैसे की खुली लूट है।
– शर्मनाक है अधिकारियों का बहाना: पुल गिरने के बाद अधीक्षक अभियंता ने कहा – “भारी बारिश से गिरा”। क्या मजाक है! अगर पुल बारिश से ही गिरने थे तो इंजीनियरों और करोड़ों के बजट की क्या जरूरत है? यह बयान सरकार के घटिया निर्माण को बचाने की नाकाम कोशिश है।
– नाडेकल पुल से लेकर आज तक, सिर्फ लीपापोती: यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कोरची का नाडेकल पुल भी इसी तरह गिरा था। तब की अधीक्षक अभियंता नीता ठाकरे के कार्यकाल के कई कामों पर संगठनों ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, लेकिन सरकार ने कार्रवाई के नाम पर फाइलों को धूल खाने के लिए छोड़ दिया। आखिर किसे बचाया जा रहा है?
स्वास्थ्य विभाग वेंटिलेटर पर, माताएं और बच्चे मरने को मजबूर
दूसरी तरफ जिले का स्वास्थ्य महकमा खुद बीमार पड़ा है। गडचिरौली में माता और शिशु मृत्यु का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
आरोप है कि जिला शल्य चिकित्सक डॉ. वर्षा लहाड़े और स्वास्थ्य उपनिदेशक डॉ. शंभरकर हर मौत के बाद एक ही घिसा-पिटा नाटक करते हैं – औपचारिक स्पष्टीकरण दो और एक जाँच समिति बना दो। जमीन पर कोई डॉक्टर नहीं, कोई सुविधा नहीं, कोई ठोस कदम नहीं। क्या गरीब आदिवासी माँ-बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं इस सरकार में?
8 महीने से पालकमंत्री लापता, अधिकारी बेलगाम
और इस सब पर सबसे बड़ा सवाल – जिले के पालकमंत्री देवेंद्र फडणवीस पिछले 8 महीनों से गडचिरौली में नहीं आए हैं। सह-पालकमंत्री आशीष जायसवाल भी गायब हैं। जब जिले का मुखिया ही जिले को भगवान भरोसे छोड़ देगा, तो अधिकारी मनमानी क्यों नहीं करेंगे?
गडचिरौली की जनता आज एक ही सवाल पूछ रही है सरकार से –
जब तक कोई बड़ा नेता नहीं मरेगा, तब तक क्या आप ऐसे ही पुलों को गिरने देंगे? ऐसे ही माताओं को मरने देंगे?
जाँच नहीं, अब जवाब चाहिए। और दोषियों पर FIR और बर्खास्तगी चाहिए।
यह स्टील हब का सपना है या मौत के हब की हकीकत?
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