कोटा के ज्योतिषाचार्य पूरन सोनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं का सम्मान

वृंदावन में द्वादश विश्व ज्योतिष एवं वेद महासम्मेलन का भव्य आयोजन
कोटा के ज्योतिषाचार्य पूरन सोनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं का सम्मान
कोटा/वृंदावन। वेदव्यास वेद प्रचार अनुसंधान गुरुकुलम द्वारा संचालित ऑल इंडिया फलौदी एस्ट्रोलॉजिकल रिसर्च सोसाइटी के तत्वावधान में द्वादश विश्व ज्योतिष, तंत्र, वास्तु, कर्मकांड, आयुर्वेद, योग एवं वेद महासम्मेलन का त्रिदिवसीय आयोजन श्री कुंज बिहारी सेवा धाम, रुक्मणी विहार, श्रीधाम वृंदावन में 18 से 20 सितंबर तक किया गया। सम्मेलन में देशभर से ज्योतिषाचार्य, विद्वान, धर्मप्रेमी एवं भारतीय प्राच्य विद्याओं से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।
सम्मेलन के दौरान कोटा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पूरन सोनी को ज्योतिष एवं वैदिक शैक्षिक गतिविधियों तथा भारतीय प्राच्य विद्याओं के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान ज्योतिष, तंत्र, वास्तु, अंक विद्या, योग, आयुर्वेद, कर्मकांड सहित अन्य भारतीय प्राच्य विद्याओं एवं वेद अनुसंधान के क्षेत्र में समर्पण भाव से किए जा रहे कार्यों को दृष्टिगत रखते हुए प्रदान किया गया।
इसके साथ ही कोटा की ज्योतिषाचार्य रेणु गुप्ता, प्रमिला गुप्ता, नितिका शर्मा, बृजराज गौतम, मीनाक्षी गौतम, रमाकांत गौतम एवं विमल कौशिक महाराज सहित अन्य प्रतिभाओं को ज्योतिष के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।
सम्मेलन के प्रचार-प्रसार एवं इंटरव्यू के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर शर्मा एवं मयूर सोनी को भी सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि कार्यक्रम को देशभर में व्यापक स्तर पर पहुंचाने तथा विभिन्न विद्वानों और अतिथियों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सम्मान समारोह में संस्थापक अध्यक्ष अजय कुमार श्यामानन्दी, कार्यक्रम प्रभारी हिमांशु शर्मा, कार्यक्रम अध्यक्ष ज्योतिर्विद अनिल कुमार पाराशर, विशिष्ट अतिथि राधा गर्ग एवं मुख्य अतिथि उमंग तनेजा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
आयोजन के दौरान भारतीय संस्कृति, ज्योतिष, वेद, वास्तु, आयुर्वेद, योग एवं अन्य प्राच्य विद्याओं के संरक्षण, अनुसंधान और प्रचार-प्रसार पर विचार-विमर्श किया गया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे विद्वानों ने अपने अनुभव एवं विचार साझा किए। सम्मेलन में सम्मानित प्रतिभाओं ने आयोजन समिति का आभार व्यक्त करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं उसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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