गुरुजी के तबादले की खबर सुन फूट-फूटकर रो पड़े बच्चे

गुरुजी के तबादले की खबर सुन फूट-फूटकर रो पड़े बच्चे
14 वर्षों की सेवा ने बनाया ऐसा रिश्ता कि विदाई की खबर पर बंद कर दिया स्कूल का गेट, बोले—‘सर, आप मत जाइए’
विंढमगंज सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_ शिक्षक और शिष्य के रिश्ते की गहराई उस समय भावुक कर देने वाले दृश्य में बदल गई, जब विंढमगंज कंपोजिट विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक राजकमल यादव के स्थानांतरण की खबर मिलते ही बच्चे उन्हें रोकने के लिए स्कूल के मुख्य गेट पर डट गए। किसी की आंखों में आंसू थे तो कोई गेट से लिपटकर बिलख रहा था। बच्चे बार-बार यही कहते नजर आए—“सर, आप मत जाइए।”
राजकमल यादव पिछले 14 वर्षों से इसी विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अपने सरल व्यवहार, आत्मीयता और पढ़ाने के अनोखे अंदाज से उन्होंने बच्चों के बीच ऐसी जगह बनाई कि वह उनके लिए महज शिक्षक नहीं, बल्कि अभिभावक और मार्गदर्शक बन गए।
बताया जाता है कि राजकमल यादव के प्रयासों से विद्यालय में शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ। ब्लॉक और जिला स्तरीय परीक्षाओं में विद्यालय के बच्चों ने कई बार बेहतर प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन किया। विद्यालय का भौतिक वातावरण और सुंदरता भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की व्यवस्था और शैक्षणिक माहौल किसी निजी विद्यालय से कम नहीं है।
गुरुवार को जैसे ही बच्चों को उनके स्थानांतरण की जानकारी मिली, माहौल अचानक भावुक हो गया। बच्चों ने स्कूल का मुख्य गेट बंद कर दिया और अपने प्रिय गुरुजी को जाने से रोकने की जिद पर अड़ गए। छोटे-छोटे बच्चे गेट से लिपटकर रोते हुए उनसे रुकने की गुहार लगाते रहे।
बच्चों का यह प्रेम देखकर राजकमल यादव भी अपनी भावनाएं नहीं रोक सके। उनकी आंखें भी नम हो गईं। उन्होंने बच्चों को समझाते हुए कहा कि वे मन लगाकर पढ़ें, अनुशासन बनाए रखें और अपने विद्यालय व माता-पिता का नाम रोशन करें।
इस भावुक दृश्य के प्रत्यक्षदर्शी विद्यालय के शिक्षक, अभिभावक और ग्रामीण भी भावुक हो उठे। काफी देर तक समझाने-बुझाने के बाद बच्चों ने नम आंखों से अपने प्रिय शिक्षक को विदाई दी।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि संजय कुमार गुप्ता ने कहा कि राजकमल यादव ने विद्यालय में शिक्षा का स्तर बेहतर करने के लिए काफी मेहनत की है। सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र कुमार ने कहा कि उनकी मेहनत और बच्चों के प्रति आत्मीय व्यवहार का ही परिणाम है कि विद्यार्थी उनसे इतना गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं।
: ‘मेरे आंसू बता रहे हैं, तेरी अहमियत क्या है…’
विंढमगंज में गुरुवार को जो दृश्य सामने आया, उसने “गुरु-शिष्य के रिश्ते” की भावनात्मक गहराई को जीवंत कर दिया। राजकमल यादव के जाने की खबर मिलते ही बच्चों की आंखों से आंसू छलक पड़े। बच्चों को रोता देख वहां मौजूद शिक्षक और अभिभावक भी अपने आंसू नहीं रोक सके। हालांकि विद्यालय के शिक्षकों और सामाजिक संगठनों की ओर से मंगलवार को राजकमल यादव का विधिवत विदाई समारोह आयोजित किया जाना प्रस्तावित है, लेकिन स्थानांतरण की खबर मिलते ही बच्चों का उमड़ा स्नेह पूरे माहौल को भावुक कर गया।
14 वर्षों की सेवा के बाद शिक्षक के जाने पर बच्चों का इस तरह भावुक होना यह बताता है कि एक शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि अपने व्यवहार और संस्कारों से विद्यार्थियों के जीवन में ऐसी छाप छोड़ जाता है, जिसे समय और दूरी भी मिटा नहीं पाती।
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