एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सीनियर डॉक्टरों पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप

🔴 तेजकुमार जारवाल
जिला रिपोर्टर | इंदौर
वंदे भारत LIVE TV NEWS
( खास खबर )
एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सीनियर डॉक्टरों की प्रताड़ना से तंग आकर जूनियर रेसीडेंट डॉक्टर ने किया आत्महत्या का प्रयास
इंसुलिन की ओवरडोज़ देकर ली जान देने की कोशिश; 36-36 घंटे की शिफ्ट, रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना का लगाया आरोप
इन्दौर (विशेष प्रतिनिधि)।
शहर के प्रतिष्ठित महात्मा गांधी स्मृति (M.M.G.) मेडिकल कॉलेज में कार्यस्थल पर प्रताड़ना और टॉक्सिक कल्चर का एक गंभीर मामला सामने आया है। स्त्री एवं प्रसूति रोग (Gynecology) विभाग की प्रथम वर्ष की जूनियर रेसीडेंट (JR-1) डॉक्टर ने अपने सीनियर डॉक्टरों की लगातार मानसिक प्रताड़ना, रैगिंग और अत्यधिक काम के दबाव से तंग आकर इंसुलिन का ओवरडोज़ ले लिया। गंभीर हालत में उन्हें एमवाई (M.Y.) अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ है।
36 घंटे लगातार ड्यूटी और ग्रुप बनाकर निशाना बनाने का आरोप
पुलिस को दिए बयान में पीड़िता ने बताया कि उन्हें लगातार 36-36 घंटे तक गैर-मानवीय शिफ्ट में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। जब उन्होंने इस अत्यधिक काम के शेड्यूल का विरोध किया, तो सीनियर डॉक्टरों ने उनके खिलाफ एक ग्रुप बना लिया और उन्हें निशाना बनाना शुरू कर दिया। सीनियरों पर आरोप है कि उन्होंने जूनियर डॉक्टर को परीक्षा में फेल करने की धमकी दी, उन पर अनावश्यक गैर-मेडिकल काम थोपे और उनका मानसिक व सामाजिक बहिष्कार किया।
शिकायत के बावजूद नहीं हुई ठोस कार्रवाई
पीड़िता के परिजनों का कहना है कि उन्होंने विभागाध्यक्ष और कॉलेज प्रशासन को भी सीनियर डॉक्टरों के इस दुर्व्यवहार की मौखिक व लिखित सूचना दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट शिकायत लीक होने के बाद सीनियर डॉक्टरों द्वारा उत्पीड़न और बढ़ा दिया गया। प्रताड़ना से आहत होकर डॉक्टर ने कदम उठाने से पहले अपने भाई और विभाग प्रमुख को डिस्ट्रेस मैसेज (मदद का संदेश) भी भेजा था।
एनएमसी तक पहुँचा मामला, कॉलेज प्रशासन ने गठित कीं 3 जांच कमेटियां
घटना की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता के भाई ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें दोषी डॉक्टरों के खिलाफ एंटी-रैगिंग और बीएनएस की धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
इधर, एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कॉलेज के डीन ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन अलग-अलग जांच कमेटियों का गठन किया है। कमेटियों ने विभागाध्यक्ष और संबंधित सीनियर डॉक्टरों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। पुलिस भी मामले में प्रत्यक्षदर्शियों व डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
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