*राजकीय महाविद्यालय नारनौल में युवाओं के स्वास्थ्य की चुनौतियां और आधुनिक जीवनशैली” पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया “*81

*राजकीय महाविद्यालय नारनौल में युवाओं के स्वास्थ्य की चुनौतियां और आधुनिक जीवनशैली” पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया "*
*अधिकतर रोगों की जड मॉडर्न लाइफस्टाइल है (आधुनिक जीवनशैली है) योगीराज डॉ यशपाल आर्य*
राजकीय महाविद्यालय नारनौल में युवा रेड क्रॉस प्रकोष्ठ के सानिध्य में “ युवाओं के स्वास्थ्य की चुनौतियां और आधुनिक जीवनशैली” विषय पर आरोग्य भारती हरियाणा के सौजन्य से एक प्रेरणादायक संगोष्ठी का आयोजन प्राचार्य डॉ कृष्ण कुमार की अध्यक्षता में किया गया। प्राचार्य डॉ कृष्ण कुमार ने विधार्थियों को आज हमारा युवा बाजार पाश्चात्य संस्कृति वाले बेमेल भोजन का सेवन करता है जिसके कारण कई प्रकार के रोगों से युवा और समाज ग्रस्त हो रहा है अतः पूरे समाज और युवाओं को विरुद्ध आहार(बेमेल खाने) का गहन अध्ययन कर और अपने शुद्ध देसी और लोकल आहार के सेवन और अनुसरण करने का आवाहन किया।महाविद्यालय प्रेस प्रवक्ता और यूथ रेडक्रॉस अधिकारी प्रोफेसर डॉ चंद्र मोहन ने बताया कि कार्यक्रम में महाविद्यालय यूथ रेडक्रॉस के सानिध्य में युवाओं के स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया और साथ ही साथ आरोग्य भारती के स्वच्छ जीवन शैली ब्रोसर का प्रमोशन किया गया और उचित आहार बिहार व्यहवार और नशामुक्ति जागरूकता शपथ दिलवाई गई।इस संगोष्ठी में प्रमुख वक्ता आरोग्य भारती के प्रान्त सचिव योगीराज डॉ यशपाल आर्य रहें । डॉ यशपाल आर्य ने विद्यार्थियों को बताया कि आज संसार में लगातार रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। अधिकतर रोगों की जड़ आधुनिक जीवनशैली है। उन्होंने आधुनिकता की भागदौड़ में होने वाले रोगों की जानकारी दी मुख्यरूप तनाव जनित रोगों में बढ़ोतरी, जैसे माइग्रेन, सर्वाइकल, अनिद्रा, याददाश्त, भूलने की आदत बढ़ना, मन की चंचलता बढ़ना, ज्यादा उग्र रहना या भयभीत रहना आदि और उनसे बचने के लिए सचेत किया। हम सभी को अपने आसपास वातावरण को साफ़ सुथरा रखे और अपनी रसोई में पकाया हुआ भोजन ही सेवन करना चाहिए। अपनी रसोई में सफेद नमक, चीनी, मैदा, रिफाइंड तथा एल्युमिनियम के बर्तन का प्रयोग बन्द करे और बाजार तले भुने मिलावट के बने हुए समान का निषेध रखे। लाइफ साइंस विभाग विभागाध्यक्ष डॉ सत्य पाल सूलोदिया ने स्वास्थ्य विषय पर बोलते हुए कहा कि आज भारत में सर्वत्र जहां योग्य डॉक्टर्स, अच्छे अस्पताल और रोग परीक्षण के उत्कृष्ट उपकरण उपलब्ध है। पहले की तुलना में माता-पिता अच्छा खाना अपने परिवारों में उपलब्ध करा रहे हैं इसके बावजूद भी अस्पताल में बढ़ती रोगियों की कतारें चिंतन-मनन का विषय है।समाज में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति पर बोलते हुए उन्होंने कहा नशे से स्वास्थ्य, धन, इज्जत और परिवार की शांति नष्ट होती जा रही है नशे में धुत व्यक्ति अपने परिवार की सुरक्षा भी नहीं कर पाता है जिससे नशे से जुड़े अपराध भी बढ़ रहे हैं इसका समाधान बताते हुए उन्होंने कहा महाविद्यालय और विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को प्रारंभ से ही नशे के दुष्प्रभाव पर जागरूक करने की आवश्यकता है। प्रोफेसर डॉ सतीश सैनी बताया कि की रसोई घर में डस्टबिन और सिंक को स्वच्छ रखे तथा स्वच्छ जल का सेवन करे और घर के परिवेश में औषधीय पौधे लगाने चाहिए अपना घर पॉलिथीन मुक्त रहना चाहिए भोजन विज्ञान पर बात करते हुए उन्होंने कहा की ऋतु के अनुसार भोजन करना चाहिए और बेमेल खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। एक समय था जब हमारी दादी–नानी भोजन विज्ञान की अच्छी जानकारी रखती थी । इस कार्यक्रम को सफल बनाने सम्पूर्ण महाविद्यालय परिवार सदस्यों ने अहम् भूमिका निभाई।
डॉ चन्द्र मोहन पब्लिक रिलेशन आफिसर राजकीय महाविद्यालय नारनौल
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