स्व. हरिश्चंद्र जैन जी की 106वीं जयंती पर ‘संघ के पंच परिवर्तन’ विषय पर विचार गोष्ठी

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे स्व. श्री हरिश्चंद्र जैन जी की 106वीं जयंती के अवसर पर आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज, सागर के सेमिनार हॉल में ‘संघ के पंच परिवर्तन’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामाजिक समरसता संयोजक, मध्य क्षेत्र सुनील देव रहे। अध्यक्षता आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज की प्राचार्य डॉ.
सरोज गुप्ता ने की। कार्यक्रम में रानी अवंती बाई लोधी विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ.
शक्ति जैन ने सारस्वत वक्ता के रूप में स्व. हरिश्चंद्र जैन जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके प्रचारक जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग एवं संस्मरण साझा किए।
उन्होंने कहा कि उनका जीवन राष्ट्र एवं समाज के प्रति समर्पण, सेवा और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता की प्रेरणादायी गाथा रहा। मुख्य वक्ता सुनील देव ने कहा कि स्व.
हरिश्चंद्र जैन जी का जीवन समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण था। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र निर्माण, समाज जागरण और भारत माता की सेवा के लिए समर्पित रहा।
उन्होंने कहा कि स्व. हरिश्चंद्र जैन जी की जयंती पर संघ के पंच परिवर्तन को अपने जीवन के आचरण में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य और पर्यावरण संरक्षण को संघ के पंच परिवर्तन के प्रमुख आयाम बताते हुए इनके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को केवल चर्चा तक सीमित न रखते हुए व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि स्व.
हरिश्चंद्र जैन जी का जीवन समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे पितृपुरुष की जयंती मनाना सभी के लिए गौरव का विषय है।
उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान है। स्वागत भाषण में कार्यक्रम के संयोजक मधुसूदन खेमरिया ने बताया कि "स्व.
हरिश्चंद्र जैन जी सागर के मूल निवासी थे और स्वतंत्रता से पूर्व सागर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रथम प्रचारक के रूप में निकले थे। उन्होंने अखंड भारत के लाहौर में प्रचारक के रूप में राष्ट्रकार्य किया।
वे सागर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे तथा आपातकाल के दौरान 19 माह तक जेल में रहे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रकार्य और समाजसेवा के लिए समर्पित किया।
सागर से उनका गहरा जुड़ाव रहा और उनका जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कार्यक्रम का संचालन कवि डॉ.
नलिन जैन ‘निर्मल’ ने किया। अतिथि परिचय एकता खेमरिया ने दिया तथा आभार प्रदर्शन निलेश पाटकर ने किया।
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया गया। इस अवसर पर जे.के.
जैन, एन.के. जैन, अरविंद जैन, विवेक जैन, अनुराग भारद्वाज, बसंत श्रीवास्तव, अनिल पांडे, हरिराम प्रजापति, मनीष दुबे, सचिन यादव, नारायण सिंह, गोविंद असाटी, आरके तिवारी, ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव, मनोरमा गौर, निधि दुबे, श्वेता नेमा, शोभा सराफ, कुमारी मित्रा जैन, श्रावणी देव, आराधना सिंह सहित अनेक गणमान्यजन एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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