आगर-मालवा, 12 अक्टूबर। कम जमीन में भी खेती को फायदे का सौदा बनाया जा सकता है, बशर्ते फसल चयन और खेती का तरीका बेहतर हो। आगर-मालवा जिले के प्रगतिशील किसान सुंदरलाल शर्मा ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ मिश्रित फसल पद्धति अपनाकर इसे साबित किया है। वे महज दो बीघा भूमि से सालाना करीब दो लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी यह पहल जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
सुंदरलाल शर्मा ने एक एकड़ भूमि में मिश्रित एवं बहुफसली खेती का मॉडल विकसित किया है। इसमें न्यू सेलर मौसंबी, पपीता, गेंदा, चिया सीड्स, मोरिंगा, हल्दी, कपास, अरहर और विभिन्न दलहनी फसलों का उत्पादन एक साथ किया जा रहा है। विविध फसलों की इस पद्धति से भूमि का बेहतर उपयोग हो रहा है। वहीं, दलहनी फसलों के समावेश से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
*ड्रिप और मल्चिंग से पानी की बचत, उत्पादन में बढ़ोतरी*
किसान सुंदरलाल शर्मा को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन और शासकीय सहायता मिली है। उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली एवं मल्चिंग के लिए 50 प्रतिशत अनुदान तथा सब्जी सहायता प्रणाली योजना के तहत 10 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई। इन तकनीकों के उपयोग से सिंचाई के पानी की बचत के साथ फसलों के बेहतर उत्पादन में मदद मिली है।
*बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री ने की सराहना*
कम भूमि में विविध फसलों का उत्पादन कर बेहतर आय अर्जित करने वाले किसान सुंदरलाल शर्मा की खेती अब जिले में चर्चा का विषय बन रही है। हाल ही में आगर की नवीन कृषि उपज मंडी में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी उनसे संवाद किया। मुख्यमंत्री ने उनकी प्राकृतिक एवं जैविक खेती की पद्धति के बारे में जानकारी ली और उनके प्रयासों की सराहना की।
सुंदरलाल शर्मा का खेती का यह मॉडल बताता है कि पारंपरिक खेती के साथ वैज्ञानिक तकनीकों और फसल विविधीकरण को अपनाकर किसान कम भूमि में भी अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।