डेढ़ साल बाद भी खाली हाथ पुलिस, ‘पॉलीग्राफ रिपोर्ट’ के सहारे टिकी खाकी की साख!

अजीत मिश्रा (खोजी)
डेढ़ साल बाद भी खाली हाथ पुलिस, ‘पॉलीग्राफ रिपोर्ट’ के सहारे टिकी खाकी की साख!
मासूम से दरिंदगी और हत्या का मामला: 121 मोबाइल सर्विलांस पर, 52 DNA टेस्ट… फिर भी कातिल बेखौफ!
विशेष रिपोर्ट | बस्ती
- गाजियाबाद की लैब पर टिकी आस: क्या पॉलीग्राफ खोलेगा मासूम की हत्या का राज?
- कागजी जांच या इंसाफ? 1.5 साल बाद भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची पुलिस!
- तकनीक भारी, नतीजे शून्य: सर्विलांस और डीएनए के बाद भी दरिंदा पुलिस की पहुंच से दूर!
- कब मिलेगा मासूम को न्याय? पीड़ित परिवार का दर्द बरकरार, सिस्टम से उठ रहा भरोसा!
- सिद्धनाथ गांव का यक्ष प्रश्न: डेढ़ साल पहले हुई दरिंदगी का असली गुनाहगार कौन?
बस्ती।। सिद्धनाथ गांव में डेढ़ साल पहले हुई एक मासूम बालिका के साथ दरिंदगी और निर्मम हत्या के जघन्य मामले में पुलिस की तफ्तीश अब भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। डेढ़ वर्ष बीत जाने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
खाकी की साख पर लगा दांव
करीब डेढ़ वर्ष पूर्व (18 मई 2025) सिद्धनाथ गांव की रहने वाली एक छह वर्षीय बालिका अचानक दोपहर में लापता हो गई थी। जब पुलिस ने तलाश शुरू की, तो गांव के बाहर मासूम का शव क्षत-विक्षत हालत में मिला था। मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म और निर्मम हत्या की पुष्टि हुई थी। इस रूह कंपा देने वाली घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया था।
जांच के आंकड़े भारी, लेकिन नतीजा शून्य!
मामले का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया है:
- 121 संदिग्ध व्यक्तियों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर रखकर रडार पर लिया गया।
- 52 लोगों का DNA टेस्ट कराया जा चुका है।
- 4 संदिग्धों की पॉलीग्राफ जांच कराई गई है।
इतने बड़े पैमाने पर जांच और तकनीकी सर्विलांस के बावजूद पुलिस कातिल तक पहुंचने में नाकाम रही है। अब पुलिस की पूरी उम्मीदें विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) गाजियाबाद से आने वाली पॉलीग्राफ परीक्षण रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
पीड़ित परिवार का छलकता दर्द
समय बीतने के साथ पीड़ित परिवार का दर्द और बढ़ता जा रहा है। परिवार का कहना है कि वे न्याय के लिए लगातार भटक रहे हैं और उनकी बस एक ही मांग है कि मासूम के दरिंदे को जल्द से जल्द कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिले।
अधिकारियों का दावा: “टीम हर पहलू पर मुस्तैद”
मामले पर अपर पुलिस अधीक्षक श्यामाकांत का कहना है:
“हमने वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता दी है। सर्विलांस और डीएनए टेस्ट के अलावा चार संदिग्धों की पॉलीग्राफ जांच कराई गई है। फॉरेंसिक लैब से पॉलीग्राफ रिपोर्ट प्राप्त होते ही कड़ियों को जोड़ा जाएगा और दोषी को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। टीम हर पहलू पर मुस्तैदी से काम कर रही है और रिपोर्ट के लिए पुलिस टीम को गाजियाबाद भेज दिया गया है।”
बड़ा सवाल: क्या गाजियाबाद से आने वाली पॉलीग्राफ रिपोर्ट से मासूम को न्याय मिल पाएगा या फिर यह मामला सिर्फ कागजी जांच और रिपोर्टों के फेर में ही उलझा रहेगा?
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