जन आस्था विश्वास और परंपरा का संगम है मां बिजासन माता मंदिर

*शारदीय नवरात्रि पर विशेष*
*जनआस्था, विश्वास और परंपरा का संगम है माँ बिजासन माता मंदिर, कानड़*
जिला संवाददाता -पीएल तिवारी वंदे भारत लाइव टीवी के ल
आलेख – जगदीश चन्द्र मालवीय
आगर-मालवा जिले के कानड़ नगर में स्थित माँ बिजासन माताजी का मंदिर नगर का प्रमुख शक्ति-स्थल एवं जनआस्था का केन्द्र है। कानड़, आगर-मालवा जिले की महत्वपूर्ण उपतहसील एवं नगर परिषद है, जो जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
नगर के एक छोर पर स्थित यह मंदिर स्थानीय जनजीवन का अभिन्न अंग है। इतिहास एवं पौराणिक महत्व
माँ बिजासन माता का नामकरण मार्कण्डेय पुराण में वर्णित दुर्गा सप्तशती के अष्टम अध्याय की कथा से जुड़ा है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार देवी दुर्गा ने रक्तबीज नामक असुर का वध किया था। रक्तबीज को वरदान था कि उसके रक्त की प्रत्येक बूंद से उसी के समान दूसरा असुर उत्पन्न होगा।
माता ने उसके रक्त को भूमि पर गिरने नहीं दिया और उसका संहार कर उसके ऊपर आसन लगाकर विराजमान हुईं, इसलिए देवी को बीजासन , बिजासन माता कहा जाता है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार कानड़ नगर में स्थित यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है।
पूर्व में इस क्षेत्र में सघन वन एवं पशुधन पर निर्भर सभी समुदाय का निवास था। बताया जाता हे कि लाखा बंजारा की दिव्य कन्या के चमत्कार एवं अंतर्ध्यान होने के पश्चात इसी स्थान पर माता की पिंडी स्वरूप प्रतिमा प्रकट हुई।
कालांतर में स्थानीय श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कर इसे वर्तमान स्वरूप प्रदान किया गया। मंदिर की वास्तुकला मालवा की परम्परागत मंदिर शैली पर की आधारित है।
पुरातात्विक एवं प्राचीन महत्व
यद्यपि मंदिर के निर्माण का कोई लिखित शिलालेख उपलब्ध नहीं है, तथापि स्थानीय विद्वानों एवं बुजुर्गों के अनुसार यह मंदिर अति प्राचीन है। प्रतिमा का स्वरूप स्वयंभू माना जाता है।
इस क्षेत्र के अन्य माता मंदिरों की भांति यहाँ भी माँ की सात बहनों की प्रतीकात्मक पूजा का विधान है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित पिंडी पर सिंदूर लेपन एवं श्रृंगार की परम्परा अति प्राचीन काल से चली आ रही है।
प्रतिमा का स्वरूप
गर्भगृह में माँ बिजासन माता की प्राचीन पाषाण प्रतिमा स्थापित है, जिसमें माता रक्तबीज असुर को आसन बनाकर विराजमान हैं। प्रतिमा पर नित्य सिंदूर, चुनरी एवं श्रृंगार अर्पित किया जाता है।
प्रतिमा का तेजस्वी एवं वात्सल्यमयी स्वरूप श्रद्धालुओं को विशेष आकर्षित करता है। जन आस्था, विश्वास एवं मान्यताएं
माँ बिजासन माता को नगर की रक्षिका एवं कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है।
मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। विशेष रूप से विवाह से पूर्व माता पूजन,नवविवाहित जोड़े एवं संतान के स्वास्थ्य की कामना लेकर आने वाले भक्तों का यहाँ तांता लगा रहता है।
नवरात्रि पर्व पर माता के दरबार में विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने की मान्यता है। नगर में किसी भी शुभ कार्य से पूर्व माता के दर्शन की परम्परा है।
पूजा परंपरा एवं पर्व
मंदिर में नित्य प्रातः एवं सायं आरती, श्रृंगार एवं भोग की परम्परा है। प्रातःकाल मंगला आरती, दोपहर में भोग आरती एवं सायंकाल शयन आरती की जाती है।
चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में यहाँ नौ दिवसीय विशेष अनुष्ठान, घट स्थापना, अखंड ज्योति प्रज्वलन, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। नवरात्रि में मंदिर को आकर्षक विद्युत सज्जा एवं फूलों से सजाया जाता है।
प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं, जबकि नवरात्रि एवं फागुन माह की पूर्णिमा पर यह संख्या हजारों में पहुँच जाती है। पुजारी परम्परा
मंदिर की पूजा एवं देखरेख की परम्परा पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानीय पुजारी परिवार द्वारा निभाई जा रही है।
वर्तमान पुजारी द्वारा पूर्ण विधि-विधान से नित्य पूजा संपन्न कराई जाती है तथा नवरात्रि जैसे पर्वों पर विशेष पूजा का दायित्व भी पुजारी परिवार द्वारा ही संभाला जाता है। मंदिर समिति एवं नगर परिषद कानड़ द्वारा मंदिर व्यवस्था में सहयोग प्रदान किया जाता है।
कानड़ नगर का माँ बिजासन माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, अपितु मालवा की लोक संस्कृति, अटूट आस्था एवं परम्परा का जीवंत प्रतीक है। मां बिजासन माता के प्रति आस्था का एक उदाहरण है कि कानड़ के सभी छोटे मोटे व्यवसाय व्यापारी दुकानदार रोजाना अपने व्यवसाय का प्रारंभ मां बिजासन माता मंदिर में दर्शन करने के बाद करते हैं जो उनकी माता के प्रति आस्था और विश्वास को प्रदर्शित करता है।।
स्थानीय श्रद्धालु और बुजुर्गों के अनुसार पूर्व में या मंदिर गांव में स्थित प्राचीन बावड़ी के समीप निर्माण होकर माता की प्रतिमा स्थापित की जाना थी परंतु वहां पर मंदिर का निर्माण नहीं हो पाने के कारण गांव के भील समाज के पूर्वजों ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी जमीन उपलब्ध कराई और इस मंदिर का निर्माण करवाया इस मंदिर में भील समाज के नानूराम जी एवं उनके परिवार के सदस्य ही पूजा अर्चना करते थे वर्तमान पुजारी श्री सुखदेव जी बिजापारी के अनुसार नानूराम जी के पश्चात उनके दादाजी मां बिजासन की सेवा पूजा अर्चना करते रहे हैं और अब वे मंदिर के पुजारी का दायित्व निर्वहन कर रहे हैं। जैसा मंदिर के पुजारी श्री सुखदेव जी बिजापारी एवं कानड़ निवासी पत्रकार श्री दारा सिंह आर्य ने बताया।
जय मां बिजासन माता, जय हो । ✍️….
जगदीश चंद्र मालवीय,
आरजी 3, टिल्लर कॉलोनी, बड़ौद रोड़
आगर मालवा (मध्य प्रदेश
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