*"मैं 100 साल जियूँ या ना जियूँ, लेकिन 100 बार रक्तदान जरूर करूंगा" – डॉ. लाला आजाद*
*जन्मदिन को बनाया जीवन बचाने का दिन, 21 साल की उम्र में सातवीं बार किया रक्तदान
जयपुर |बहलोड गांव के निवासी युवा साथी डॉ. लाला आजाद ने मानवता की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। डॉ. आजाद ने आज अपने 21वें जन्मदिन के अवसर पर लगातार सातवीं बार रक्तदान कर अपने जन्मदिन को यादगार बना दिया।
डॉ. आजाद ने SMS हॉस्पिटल, जयपुर में रक्तदान किया, जहां वे पहले भी रक्तदान कर चुके हैं। इस दौरान उनके कई दोस्तों ने भी स्वेच्छा से रक्तदान कर इस नेक कार्य में सहयोग दिया।
डॉ. आजाद ने इस मौके पर कहा – *"मैं 100 साल जियूँ या ना जियूँ, लेकिन अपने जीवन काल में 100 बार रक्तदान जरूर करूंगा।"*
*रक्तदान सबसे बड़ा दान -*
डॉ. लाला आजाद का यह कदम केवल एक स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश है। उनका कहना है कि धर्म, जाति और वर्ग की सीमाओं से ऊपर उठकर इंसान को इंसान के लिए खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा, "रक्तदान से आपका कुछ भी खर्च नहीं होगा, लेकिन आपका यही रक्तदान किसी के लिए जीवनदान साबित होगा। हम किसी धर्म या विचारधारा से पहले एक इंसान हैं।"
डॉ. आजाद युवाओं के बीच सामाजिक चेतना और जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है, और हर युवा को साल में कम से कम दो बार रक्तदान अवश्य करना चाहिए।
*दोस्तों ने भी दिया साथ -*
जन्मदिन के अवसर पर आयोजित रक्तदान शिविर में डॉ. अंकित डाबरिया, डॉ. विशाल राज वर्मा, डॉ. कार्तिक बुनकर, डॉ. पुलकित वर्मा, डॉ. अंकित बैरवा, डॉ. जयराम बुनकर, विनोद बुनकर सहित कई युवाओं ने भी रक्तदान किया।