जिला रिपोर्टर सुरेश चौहान आगर मालवा मध्य प्रदेश *एक छोटी-सी सीख, जिसने बदल दी जिंदगी की आदत* *शर्ट का पहला बटन… अनुशासन और मर्यादा का बड़ा सबक* *एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की दो

आगर-मालवा। जीवन में कुछ सीख ऐसी होती हैं, जो बड़े-बड़े उपदेशों से नहीं, बल्कि छोटी-सी समझाइश से मिलती हैं। कई बार किसी वरिष्ठ का एक वाक्य जिंदगीभर के लिए हमारी आदत और व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है। ऐसी ही एक प्रेरक सीख साझा की है आगर के जगदीश मालवीय ने, जिन्हें एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने शर्ट के गले का पहला बटन लगाने की छोटी-सी नसीहत देकर अनुशासन और कार्यालयीन मर्यादा का बड़ा पाठ पढ़ाया।
जगदीश मालवीय बताते हैं कि अपने लंबे शासकीय सेवाकाल में उन्हें कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ काम करने का अवसर मिला। सभी का स्नेह और सहयोग मिला, लेकिन एक युवा, समर्पित एवं कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की दी हुई सीख उनके जीवन में हमेशा के लिए उतर गई।
ग्रामीण परिवेश में पढ़ाई कर शासकीय सेवा में आए मालवीय को उस समय प्रोटोकॉल और कार्यालयीन मर्यादाओं की बहुत अधिक जानकारी नहीं थी। वे सहज स्वभाव से जैसे रहते आए थे, वैसे ही कार्यालय में भी रहते थे। इसी दौरान एक दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की बैठक में जिले के मुखिया के रूप में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारी ने इशारे से उन्हें शर्ट के गले का पहला बटन लगाने को कहा।
पहली बार वे अधिकारी का इशारा पूरी तरह समझ नहीं पाए। कुछ समय बाद फिर वही स्थिति बनी तो अधिकारी ने दोबारा समझाइश देते हुए कहा कि शर्ट का गले वाला पहला बटन हमेशा लगाकर रखा करें। यह कार्यालयीन अनुशासन और आधिकारिक मर्यादा के अनुरूप है।
मालवीय बताते हैं कि दूसरी बार टोकने पर उन्हें भीतर से काफी बुरा लगा। उन्होंने खुद से सवाल किया कि आखिर एक ही गलती दोबारा क्यों हुई? बस, उसी दिन उन्होंने अधिकारी की इस सीख को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प ले लिया।
इसके बाद घर से निकलने से पहले शर्ट का गले वाला बटन जांचना उनकी आदत बन गई। धीरे-धीरे यह आदत इतनी मजबूत हो गई कि यदि कभी जल्दबाजी में बटन लगाना भूल भी जाते हैं, तो कुछ देर बाद खुद ही इसका एहसास हो जाता है और हाथ अनायास ही गले तक पहुंच जाता है।
*छोटी बात, लेकिन जीवनभर की सीख*
जगदीश मालवीय के अनुसार, दुनिया में गलत राह दिखाने और गलत आदतें सिखाने वालों की कमी नहीं है, लेकिन सही मार्ग दिखाने वाले और जीवन को बेहतर बनाने की सीख देने वाले लोग भी मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि हम ऐसे लोगों की बातों को समझें, उनकी सीख को पहचानें और उनके अच्छे आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं।
शर्ट के गले का पहला बटन लगाने की यह छोटी-सी सीख उनके लिए केवल पहनावे का हिस्सा नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मानुशासन और कार्यस्थल की गरिमा का प्रतीक बन गई है।
*जिस अधिकारी ने कभी एक छोटे-से बटन की ओर ध्यान दिलाया था, उन्हें जगदीश मालवीय आज भी हृदय से साधुवाद देते हैं। सच ही है, कभी-कभी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख किसी बड़ी किताब में नहीं, बल्कि शर्ट के एक छोटे-से बटन में छिपी होती है।*
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