कुशीनगर एयरपोर्ट को नियमित उड़ानों से जोड़ने के लिए जेवर एयरपोर्ट के माध्यम से नई संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। यह पहल दिल्ली-एनसीआर के विमानन बाजार तक पहुंच बनाने और बौद्ध सर्किट पर

अब्दुल, वंदे भारत टीवी लाइव का संवाददाताकुशीनगर एयरपोर्ट को नियमित उड़ानों से जोड़ने के लिए जेवर एयरपोर्ट के माध्यम से नई संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। यह पहल दिल्ली-एनसीआर के विमानन बाजार तक पहुंच बनाने और बौद्ध सर्किट पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए है, जिससे यात्रियों को अधिक विकल्प मिल सकें।कुशीनगर एयरपोर्ट को फिर से नियमित उड़ानों से जोड़ने के लिए अब जेवर एयरपोर्ट के रास्ते नई संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।
डीएम संजय चौहान ने जेवर एयरपोर्ट के सीईओ आरके सिंह से मुलाकात कर कुशीनगर को हवाई सेवा के नेटवर्क से जोड़ने का मुद्दा उठाया। इस पहल के पीछे दिल्ली-एनसीआर के बड़े विमानन बाजार तक पहुंच बनाने, यात्रियों को वैकल्पिक हवाई संपर्क उपलब्ध कराने और कुशीनगर से घरेलू उड़ानों की व्यावसायिक संभावनाएं बढ़ाने की सोच है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 अक्टूबर 2021 को कुशीनगर एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था।
26 नवंबर 2021 को दिल्ली से कुशीनगर के बीच घरेलू उड़ान शुरू हुई थी। इस हवाई सेवा से क्षेत्र को देश की राजधानी से जोड़ने की उम्मीद जगी, लेकिन नवंबर 2023 के बाद उड़ान बंद हो गईं।
ऐसे में अब जेवर एयरपोर्ट के साथ संपर्क की पहल को कुशीनगर के लिए नए विमानन नेटवर्क में जगह बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।जेवर एयरपोर्ट के जरिये दिल्ली-एनसीआर के व्यापक यात्री बाजार तक पहुंच बनाने से कुशीनगर के लिए यात्रियों का आधार बढ़ाने की संभावना है। बड़े एयरपोर्ट पर उपलब्ध उड़ानों और कनेक्टिंग सेवाओं के साथ बेहतर तालमेल होने पर यात्रियों को यात्रा के अधिक विकल्प मिल सकते हैं।इससे एयरलाइंस के लिए भी नए मार्ग की व्यावसायिक उपयोगिता का आकलन करना आसान होगा।
इस पहल के पीछे तर्क यह भी है कि बड़े एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव कम करने और वैकल्पिक हवाई संपर्क विकसित करने से विमानन सेवाओं की उपलब्धता बढ़ सकती है।बौद्ध सर्किट को मिलेगी नई कनेक्टिविटी की संभावना
कुशीनगर की पहचान भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली के रूप में है। यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए हवाई संपर्क मजबूत होना पर्यटन की दृष्टि से अहम है।
कुशीनगर को जेवर के नेटवर्क से जोड़ने की पहल सफल होती है तो देश के दूसरे शहरों से आने वाले पर्यटकों के लिए यहां तक पहुंचने के विकल्प बढ़ सकते हैं।इसका लाभ होटल, परिवहन, गाइड, स्थानीय कारोबार और पर्यटन से जुड़े दूसरे क्षेत्रों को भी मिल सकता है। यह पहल केंद्र सरकार की उस व्यापक योजना के समानांतर महत्वपूर्ण है, जिसके तहत वाराणसी, गया और कुशीनगर एयरपोर्ट को एक समूह में रखकर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल पर संचालन, प्रबंधन और विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
चार अगस्त 2026 को हुई पीपीपी अप्रेजल कमेटी की 149वीं बैठक में इसको सैद्धांतिक मंजूरी दी गई थी।
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