दीपावली – कार्तिक मास अमावस्या तीथि पर धूमधाम से मनाया जाता है

दीपावली रोशनी का पर्व, साल भर का सबसे बड़ा त्योहार होता है।दीपावली प्रतिवर्ष कार्तिक मास अमावस्या तिथि के दिन मनाया जाता है। दीपावली के दिन शुभ मुहूर्त पर देवी लक्ष्मीजी और भगवान श्रीगणेश जी की संयुक्त रूप से पूजा करने का विधान है।
दीपावली पर घर, दुकान, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को सुंदर दीपों कई रोशनी से सजाया जाता है। इस दिन घर के बच्चे बुजुर्ग सभी ने वस्त्र धारण करतें हैं,संध्याकाल में परिवार के सभी सदस्य एकसाथ बैठकर देवी लक्ष्मीजी और श्रीगणेश जी ,कुबेर जी की पूजा आराधना करतें है, और परिवार की सुख शांति, समृद्धि की कामना करतें हैं।
हिंदी पंचांग अनुसार इस बार दीपावली ,कार्तिक मास अमावस्या तिथि 08 नवंबर रविवार 2026, को सुबह 11:27बजे से शुरू होकर अगले दिन सोमवार 09 नवंबर 2026 दोपहर में 12:31बजे तक रहेगी। दीपावली का पर्व 08 नवंबर रविवार को मनाया जायेगा।.दीपावली पर लक्ष्मी माता पूजा मुहूर्त = 8 नवंबर रविवार शाम को 05:55 बजे से रात 07:42बजे तक ।
प्रदोष काल- शाम 05:31बजे रात 08:08 बजे तक , वृषभ काल- शाम 05:55बजे से रात 07:51बजे तक। दीपावली पर महानिशिथ काल- लक्ष्मी पूजा- रात में 11:23बजे से 12:31बजे तक, महानिशिथ काल- रात में 11:38बजे से 12:31बजे तक।
8नवंबर दीपावली शुभ चौघड़िया मुहूर्त = सुबह 11:29 बजे से 12:04बजे तक ( अमृत), दोपहर में 01:26 बजे से दोपहर 02:48बजे तक, संध्याकाल में 05:31बजे से रात 10:26बजे तक( शुभ,अमृत, चल)।दीपावली पर लक्ष्मी पूजन सूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल में किया जाना उचित रहता है, प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में पूजन करना सबसे उत्तम माना जाता है । दीपावली के दिन लक्ष्मी-गणेश पूजा का विशेष महत्व होता है।
इस दिन संध्याकाल में रात में शुभ मुहूर्त पर माता लक्ष्मी जी, श्रीगणेश जी, माता सरस्वती जी, की पूजा आराधना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि दीपावली की रात में माता लक्ष्मी जी स्वयं इस पृथ्वीलोक पर विचरण करतीं हैं।
इस दिन भगवान कुबेर जी की भी पूजा की जाती है। पूजा से पूर्व अपने घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह से साफ सफाई कर लेनी चाहिए, और गंगाजल से घर के वातावरण की शुद्धि कर लेनी चाहिए घर के पूजा स्थल और घर के मुख्य द्वार को सुंदर रंगोली से सजाना चाहिए।
अपने पूजा स्थल पर लकड़ी की साफ चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर श्री गणेश जी,माता लक्ष्मी जी, की मूर्ति या तस्वीर रखनी चाहिए। चौकी के पास शुद्ध जल से भरा हुआ लोटा/ कलश रखना चाहिए, माता लक्ष्मी और श्रीगणेश जी को तिलक लगाना चाहिए, दीपक प्रज्वलित, जल, मौली, चावल, पुष्प, फल, गुड़, हल्दी, अबीर गुलाल, इत्यादि अर्पित किया जाना चाहिए।
इसके बाद देवी सरस्वती, देवी काली, श्री हरि विष्णु, कुबेर देव की भी विधि सहित पूजा करनी चाहिए। पूजा को बाद घर दुकान, व्यवसायिक प्रतिष्ठान की तिजोरी,बहीखाते, व्यापारिक उपकरणों की भी पूजा करनी चाहिए, पूजा आरती संपन्न होने के बाद, भक्तिभाव के साथ जरूरतमंद लोंगो को यथाशक्ति दक्षिणा और मिठाई देना चाहिए, प्रसाद स्वयं भी लें घर परिवार में सबको देना चाहिए।
कार्तिक मास अमावस्या तिथि के दिन प्रातःकाल के समय में अपने शरीर पर तेल की मालिश करने के बाद स्नान करना चाहिए, ऐसा माना जाता है कि, ऐसा करने पर धनहानि नहीं होती है। दीपावली के दिन अपने घर परिवार के बुजुर्गों का भी पूजन करना चाहिए, धूप, भोग अर्पित करना चाहिए।
हिंदू धर्म में प्रत्येक पर्व त्योहार का अपना एक विशेष महत्व होता है। ऐसा भी माना जाता है कि यह पर्व, त्योहार ग्रहों की दिशा, और विशेष योग, मानव समाज के लिए शुभ फलदायक होतें हैं।
दीपावली के पावन अवसर पर किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत, या किसी नये वस्तु की खरीदी, शुभ माना जाता है। दीपावली त्योहार का आध्यात्मिक, सामाजिक दोनों ही रूप से विशेष महत्व रहता है।
दीपावली त्योहार को आध्यात्मिक, अंधकार पर आंतरिक प्रकाश, अज्ञानता पर ज्ञान का उजाला, असत्य पर सत्य की ,बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव भी माना जाता है। दीपावली त्योहार से जुड़ी हुई मान्यताओं में प्रभू श्रीरामचंद्र जी के चौदह वर्ष वनवास पूरा कर अयोध्या नगरी में वापस की खुशी में अयोध्या वासियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर प्रभू श्रीरामचंद्र जी , माता सीताजी, भाई लक्ष्मण जी का भव्य स्वागत किया गया था।
दीपावली की यह परंपरा हमारे भारतीय संस्कृति में एक लंबे समय से चली आ रही है। दीपक भारतीय संस्कृति में पवित्रता, मंगल, ज्ञान का प्रतीक माना जाता है, और यही कारण भी है कि प्रत्येक पूजा पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों, मंगल कार्यों के दौरान दीपक प्रज्वलित करने की परंपरा रही है।
( ऊपर बताए गए पूजा समय मुहूर्त कि विधियां, क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार भिन्न भी हो सकतीं हैं, अत: अपनी परंपरा के अनुसार ही श्रद्धापूर्वक पूजन करनी चाहिए, मुहूर्त आदि के लिए क्षेत्रीय पंचांग, या किसी विद्वान ब्राह्मण,ज्योतिष से सलाह अवश्य लें ले)" दीपावली के इस शुभ अवसर पर प्रार्थना और मंत्रों का स्मरण करना मन को,एकाग्र करनें,और जीवन में सकरात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का एक माध्यम भी है। दीपावली का सही अर्थ, केवल घरों को सजाना, उत्सव मनाना, पटाखा फोड़ना ही नहीं, बल्कि अपने जीवन में भी ज्ञान, सद्भाव, सकरात्मकता, सेवा बढ़ाना है।
इसी भावना के साथ आईए हम सब मिलकर दीपावली त्योहार मनाएं, देवी लक्ष्मी जी श्रीगणेश जी,से अपने परिवार, समाज, राष्ट्र की सुख, शांति उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि, मंगल की प्रार्थना करें। दीपावली पर अनावश्यक तेज आवाज वाले बम पटाखों से दूर रहे, बच्चों को भी दूर रखें।.पर्यावरण अनुकूल दीपावली मनाएं।
स्वस्थ रहें, सदा प्रसन्नचित्त रहें।। .
।। शुभ दीपावली ।।
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