सुविधा शुल्क लेकर नशा व्यापार? सिद्धार्थनगर से बस्ती तक वर्दी पर सबसे बड़ा सवाल; योगी की जीरो टॉलरेंस को ठेंगा: थानेदार की मेहरबानी से चल रहा है गांजा कॉरिडोर
सवाल सिर्फ आरोपों का नहीं, अपराध नियंत्रण का भी है। परसा चौराहे पर हुई एक दर्जन चोरियों का खुलासा न होना और टड़वा में भीड़ द्वारा युवक को बांधकर पीटने जैसी घटनाएं बताती हैं कि खाकी का खौफ खत्म हो रहा है।
डुमरियागंज से बस्ती तक नशे का काला कॉरिडोर: खाकी पर सुविधा शुल्क लेकर गांजा व्यापार चलवाने के गंभीर आरोप
अजीत मिश्रा (खोजी)
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) / बस्ती: योगी सरकार के ‘नशा मुक्त यूपी’ के दावे को डुमरियागंज और बस्ती की सरहद पर बैठा नशा माफिया खुली चुनौती दे रहा है, और आरोप है कि इस पूरे खेल को थाने की छत्रछाया मिली हुई है।
जिले के सबसे संवेदनशील डुमरियागंज थाने में इन दिनों फरियादी नहीं, बल्कि खुद पुलिस का चाल-चरित्र सवालों के घेरे में है। प्रभारी निरीक्षक श्री प्रकाश यादव पर लगे आरोपों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा पसरा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक ही थाने में लंबी तैनाती के दौरान थानाध्यक्ष पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने, अदालत के स्थगन आदेश को दरकिनार कर वैवाहिक घर में दबिश देने और यहां तक कि एक महिला से अभद्रता व वसूली जैसे संगीन आरोप लग चुके हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उसके पास इसके पुख्ता साक्ष्य भी मौजूद हैं। सवाल सिर्फ आरोपों का नहीं, अपराध नियंत्रण का भी है। परसा चौराहे पर हुई एक दर्जन चोरियों का खुलासा न होना और टड़वा में भीड़ द्वारा युवक को बांधकर पीटने जैसी घटनाएं बताती हैं कि खाकी का खौफ खत्म हो रहा है।एक तरफ बस्ती पुलिस की अपनी प्रेस रिलीज चीख-चीख कर बता रही है कि जिले में गांजे का नेटवर्क कितना बड़ा है – अभी हाल में ही बस्ती में दो अंतरजनपदीय गांजा तस्कर गिरफ्तार हुए, जिनके पास से 1780 ग्राम गांजा बरामद हुआ। कोतवाली पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई में 1 किलो 30 ग्राम गांजा के साथ शातिरों को पकड़ा। सोनहा पुलिस ने भी 550 ग्राम गांजा के साथ तस्कर को पकड़ा है। ये सिर्फ बानगी है, असली खेल इससे कई गुना बड़ा बताया जा रहा है।
आरोपों की फेहरिस्त: क्या महकमा बहरे और अंधे हो चुके हैं?
श्री प्रकाश यादव पर लगे आरोप महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर कानून और जनता के अधिकारों का खुला उल्लंघन हैं:
- आय से अधिक संपत्ति की बू: एक ही थाने में लंबी तैनाती के दौरान अकूत चल-अचल संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। भाजपा नेता अजय त्रिपाठी ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- अराजक दबिश और अदालत की अवमानना: हाईकोर्ट के स्पष्ट स्टे ऑर्डर (स्थगन आदेश) को ताक पर रखकर शादी वाले घर में पुलिस ने जिस तरह दबिश देकर तांडव मचाया, उसने पुलिसिया गुंडागर्दी की हदें पार कर दीं।
- छेड़खानी और वसूली के संगीन दाग: डुमरियागंज पुलिस पर एक महिला से छेड़खानी करने और अवैध रूप से पैसे वसूलने के गंभीर आरोप लगे। इस शर्मनाक कृत्य के पुख्ता सबूत भी पीड़िता के पास मौजूद हैं।
- अपराध नियंत्रण में पूरी तरह फैल: क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक बड़ी चोरियां हो चुकी हैं, लेकिन खाकी चोरों को पकड़ने के बजाय सिर्फ लीपापोती करने में व्यस्त रही।
- युवती की खुदकुशी और जनता का आक्रोश: एक युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई खुदकुशी के मामले में परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। न्याय न मिलने से आजिज आकर ग्रामीणों को मजबूरन नेशनल हाईवे तक जाम करना पड़ा।
स्थानीय सूत्रों और X (पूर्व ट्विटर) सहित सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सूचनाओं के मुताबिक, बस्ती जनपद का कुख्यात गांजा माफिया डुमरियागंज थाने को अपना सेफ कॉरिडोर बनाकर नशे की खेप को गोंडा, अयोध्या और सिद्धार्थनगर में खपा रहा है। आरोप है कि बस्ती से आने वाले इस जहर के बदले हर महीने थानेदार तक मोटा ‘सुविधा शुल्क’ पहुंच रहा है।
इसी सुविधा शुल्क का नतीजा है कि –
- वर्दी का खौफ खत्म: थानाध्यक्ष श्री प्रकाश यादव पर पहले से ही आय से अधिक संपत्ति, हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर को ताक पर रखकर शादी वाले घर में दबिश, महिला से छेड़खानी-वसूली और एक दर्जन से अधिक चोरियों में लीपापोती के आरोपों की फेहरिस्त है। अब इसमें नशा व्यापार को संरक्षण देने का नया अध्याय जुड़ गया है।
- X पर सबूत, थाने में सन्नाटा: बस्ती-बॉर्डर पर गांजा बिक्री के लोकेशन, बाइक नंबर और तस्करों के नाम तक सोशल मीडिया पर लोग टैग करके पुलिस को दे रहे हैं, बावजूद इसके डुमरियागंज पुलिस ने NDPS एक्ट में एक भी बड़ी कार्रवाई पिछले 6 महीने में क्यों नहीं की? यह चुप्पी ही सबसे बड़ा सवाल है।
- युवा बर्बाद, माफिया आबाद: डुमरियागंज और बस्ती के ग्रामीण इलाकों में 16 से 25 साल के युवाओं में गांजा-स्मैक की लत तेजी से फैल रही है। माफिया सस्ते में गांजा बेचकर युवाओं को पहले आदी बनाता है, फिर वही युवा चोरी की वारदातों को अंजाम देते हैं – जिनका खुलासा थाने से नहीं हो पा रहा।
सूत्र बताते हैं कि यह पूरा सिंडिकेट ओडिशा से यूपी तक चलने वाले बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जो नमक की बोरियों और ट्रकों में गांजा छिपाकर लाता है। जब STF और दूसरी जिलों की पुलिस क्विंटलों में गांजा पकड़ रही है, तो डुमरियागंज-बस्ती बॉर्डर पर यह कारोबार बेरोकटोक कैसे चल रहा है?
सवाल बड़ा है: आखिर कौन दे रहा है संरक्षण?
जब कानून के रखवाले ही खुद कानून की धज्जियां उड़ाने लगें, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे? डुमरियागंज में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था, पुलिसिया तानाशाही और भ्रष्टाचार के इतने पुख्ता प्रमाण सामने आने के बाद भी थानाध्यक्ष के खिलाफ ठोस कार्रवाई न होना कई बड़े सवाल खड़े करता है।
क्या महकमे के कुछ बड़े अधिकारी किसी बड़े हादसे या जन-विद्रोह का इंतजार कर रहे हैं? जनता के बीच सुलगता यह गुस्सा किसी भी दिन बड़े असंतोष का रूप ले सकता है।
समय आ गया है कि शासन स्तर से तत्काल प्रभाव से इस प्रकरण का संज्ञान लिया जाए। थानाध्यक्ष श्री प्रकाश यादव की संपत्ति की उच्चस्तरीय जांच हो और उन्हें निलंबित कर सलाखों के पीछे भेजा जाए, ताकि जनता का खाकी से बचा-कुचा भरोसा पूरी तरह से न उठे। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह माना जाएगा कि भ्रष्टाचार और मनमानी को ऊपर से ही मौन संरक्षण प्राप्त है।
जनता अब पूछ रही है – क्या जीरो टॉलरेंस की नीति सिर्फ कागजों में है? क्या थाने की मेहरबानी से ही नशा माफिया इतना बेखौफ है?
मांग: इस पूरे नेक्सस की जांच SIT या एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स से कराई जाए, थानाध्यक्ष के कॉल डिटेल और बस्ती के तस्करों से कनेक्शन की जांच हो, और डुमरियागंज व बस्ती के सीमावर्ती गांवों में NDPS के तहत सघन अभियान चलाया जाए।














