रखिया पेट्रोल पंप का ‘काला खेल’: तेल डलवाते ही बंद हो रहे वाहन, चालकों में भारी रोष

अजीत मिश्रा (खोजी)
रखिया पेट्रोल पंप का ‘काला खेल’: जनता की गाढ़ी कमाई से खिलवाड़ और प्रशासनिक खामोशी
- दुबौलिया में घटिया ईंधन का कहर: तीन-चार दिनों में पांच दर्जन से अधिक गाड़ियां हुईं खराब
- रखिया पेट्रोल पंप पर गुणवत्ता की धज्जियां: कार्बोरेटर और इंजेक्टर फेल होने से उपभोक्ता परेशान
- प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल: रखिया पेट्रोल पंप के खिलाफ तत्काल जांच और मुआवजे की मांग
- महंगे तेल के नाम पर धोखा: रखिया पंप से पेट्रोल भरवाते ही कबाड़ बन रहे वाहन
बस्ती।। भिऊरा-कप्तानगंज मार्ग पर स्थित रखिया पेट्रोल पंप इन दिनों वाहन चालकों के लिए किसी आफत के अड्डे से कम साबित नहीं हो रहा है। यहां से पेट्रोल भरवाने के बाद सड़क पर दौड़ रहे दोपहिया और चारपहिया वाहन अचानक हांफकर बंद हो रहे हैं, और फिर दोबारा स्टार्ट होने का नाम नहीं ले रहे।
चार दर्जन से अधिक वाहन मालिकों की यह पीड़ा महज एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि ईंधन के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े की ओर गंभीर इशारा करती है। पकड़ी चौहान से लेकर पूरे ओरी राय और दुबौलिया तक के उपभोक्ता हरिष, मोहन गुप्ता, मुकेश सोनकर, ऋषि कुमार और विनोद सोनी जैसे दर्जनों लोग आज अपने वाहनों की बर्बादी देखकर ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
जब आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई का एक-एक पाई जोड़कर वाहन में ईंधन डलवाता है, और कुछ ही दूर चलकर वह वाहन कबाड़ में तब्दील हो जाए, तो इसे सिर्फ इत्तेफाक नहीं बल्कि ग्राहकों के साथ खुला छल कहा जाएगा। दुबौलिया कस्बे के मोटर मैकेनिक वारिस अली की गवाही इस पूरे प्रकरण की पोल खोलने के लिए काफी है।

पिछले तीन-चार दिनों में उनकी दुकान पर पांच दर्जन से अधिक गाड़ियां इसी मिलावटी या खराब ईंधन के कारण पहुंच चुकी हैं। कार्बोरेटर का जाम होना और इंजेक्टर का बैठ जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पंप पर बेचे जा रहे पेट्रोल में गुणवत्ता के सभी मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
घटिया ईंधन सीधे तौर पर इंजन की कार्यप्रणाली को तबाह कर रहा है, जिससे वाहन स्वामियों को बिना किसी गलती के हजारों रुपये की आर्थिक चपत लग रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसे पंप संचालकों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं?
क्या स्थानीय प्रशासन और संबंधित तेल कंपनियों के नुमाइंदे किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं? घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी पेट्रोल पंप प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक सफाई या जिम्मेदारी का बयान सामने न आना उनकी संदिग्ध चुप्पी को और पुख्ता करता है।
अब समय आ गया है कि जिला प्रशासन और खाद्य एवं रसद विभाग कुंभकर्णी नींद से जागे। इस पेट्रोल पंप से ईंधन के नमूने लेकर तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों पर कठोर विधिक कार्रवाई हो और भुक्तभोगी वाहन चालकों को हुए नुकसान का मुआवजा दिलाया जाए।
यदि मिलावट का यह काला कारोबार यूं ही बेखौफ चलता रहा, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरने में देर नहीं लगाएगा।
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