विकास के नाम पर ‘कमीशन का खेल’: स्टिंग ऑपरेशन में ऑनकैमरा बेनकाब हुए भाजपा-सपा विधायक

अजीत मिश्रा (खोजी)
विकास के नाम पर ‘कमीशन का खेल’: यूपी में स्टिंग ऑपरेशन में बेनकाब हुए भाजपा-सपा विधायक, अनुशंसा पत्र के लिए वसूला 35% से 40% तक कट!
- अनुशंसा-पत्र के लिए 35% से 40% तक ‘कट’: जनता के पैसों पर डाका डालते पकड़े गए जनप्रतिनिधि
- 5 करोड़ की विधायक निधि और 40% रिश्वत का खेल: यूपी के विकास की पोल खोलता बड़ा खुलासा
- महाराजगंज से आजमगढ़ तक भ्रष्टाचार का जाल: विधायक और उनके नुमाइंदों ने कैमरे पर ली घूस
- दैनिक भास्कर का स्टिंग: विधायक निधि से पैसा जारी कराने के एवज में वसूल रहे थे भारी-भरकम कमीशन
उत्तर प्रदेश में जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई से विकास कराने का दम भरने वाले जनप्रतिनिधि किस तरह व्यवस्था की रीढ़ तोड़ रहे हैं, इसका एक सनसनीखेज सच सामने आया है। दैनिक भास्कर के एक बड़े स्टिंग ऑपरेशन में सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों दलों के विधायक ऑन कैमरा बेनकाब हुए हैं। सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और वाटर कूलर जैसे बुनियादी विकास कार्यों के लिए मिलने वाली विधायक निधि से फंड जारी करने के एवज में ये विधायक 35% से 40% तक का भारी-भरकम कमीशन वसूल रहे हैं।
चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर (CDO) के पास विधायक निधि से पैसा जारी कराने के लिए विधायक का अनुशंसा-पत्र अनिवार्य होता है। जब यही अनुशंसा-पत्र नियमों और जनता के हित के बजाय मोटी घूस के आधार पर जारी होने लगे, तो ज़मीन पर उतरने वाले विकास कार्यों की गुणवत्ता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
महाराजगंज सदर: भाजपा विधायक जय मंगल कन्नौजिया का खेल
महाराजगंज सदर से भाजपा विधायक जय मंगल कन्नौजिया पर पहले भी रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लग चुके हैं। इस पूरे खेल को बेनकाब करने के लिए रिपोर्टर्स ने एक एनजीओ रजिस्टर कराया और सोलर लाइट लगाने से जुड़ी ट्रेनिंग ली। विधायक से परिचय बढ़ाने के लिए रिपोर्टर 30 दिनों तक उनके साथ गांव-गांव घूमे।
सोलर लाइट के फंड के लिए विधायक के साथ कुल 8 दौर की बैठकें हुईं। चौथे दौर की बातचीत में ही विधायक कन्नौजिया 35% कमीशन के बदले 10.50 लाख रुपए का काम देने पर राजी हो गए। इसके बाद हुई बैठकों में उन्होंने रिश्वत ली और अनुशंसा-पत्र पर हस्ताक्षर कर रिपोर्टर को सौंप दिया। सिर्फ विधायक ही नहीं, उनके करीबी संजीव शुक्ला ने भी चार बार में 5-5 हजार करके कुल 20 हजार रुपए की अवैध वसूली की।
मेंहनगर, आजमगढ़: सपा विधायक पूजा सरोज और उनके प्रतिनिधि का कारनामा
आजमगढ़ जिले की मेंहनगर सीट से समाजवादी पार्टी की विधायक पूजा सरोज और उनके रिश्तेदार व प्रतिनिधि विकास सरोज का नाम भी इस भ्रष्टाचार की फेहरिस्त में शामिल है। एनजीओ मैनेजर बनकर पहुंचे रिपोर्टर ने सोलर लाइट और वाटर कूलर लगाने का प्रस्ताव रखा। एक सैंपल लाइट इंस्टॉल करने और 15 दिनों तक गांवों में सर्वे करने के बाद 15 दौर की बैठकों का दौर चला।
12वीं मीटिंग में कमीशन पर खुलकर चर्चा हुई। इसके बाद विधायक के प्रतिनिधि विकास सरोज ने कॉल कर 35% कमीशन का आधा हिस्सा यानी 14 लाख 17 हजार 500 रुपए लेकर आने और व्हाट्सएप पर अनुशंसा पत्र भेजने की बात कही। हालांकि, स्टिंग के बेनकाब होने के कारण टीम हार्ड कॉपी लेने नहीं गई। इसके अलावा, रिपोर्टर से तीन अलग-अलग किस्तों में कुल 25 हजार रुपए कैश भी लिए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विधायक निधि का एक-एक प्रतिशत लूटने का तंत्र सक्रिय है।
5 करोड़ सालाना की विधायक निधि: विकास का जरिया या भ्रष्टाचार की दुकान?
उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधायक को जनता के विकास के लिए हर साल 5 करोड़ रुपए यानी पांच साल के कार्यकाल में कुल 25 करोड़ रुपए की विधायक निधि मिलती है। इस भारी-भरकम बजट से सड़क, नाली, खड़ंजा, सामुदायिक भवन, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था जैसे काम कराए जाने हैं।
जब जनता के प्रतिनिधि ही विकास फंड पर 35% से 40% का डाका डालने लगें, तो गांवों की तस्वीर बदलने के बजाय चुनिंदा लोगों की तिजोरियां ही भरेंगी। यह स्टिंग ऑपरेशन उस राजनीतिक और प्रशासनिक सांठगांठ को बेनकाब करता है, जहां जनता के हक का पैसा कमीशन की भेंट चढ़ रहा है और सवाल यह उठता है कि ऐसे जनप्रतिनिधियों से आम जनता न्याय की उम्मीद आखिर किससे करे।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।







