ड्रोन से ‘डिजिटल’ नकेल, पर कब तक चलेगा कच्ची शराब का ‘जहरीला खेल’?

अजीत मिश्रा (खोजी)
ड्रोन की नजर से भी नहीं बच रहे अपराधी, पर कब तक चलेगा यह ‘पकड़म-पकड़ाई’ का खेल?
- ड्रोन से पकड़े गए अपराधी, पर कब तक बेलगाम रहेगा कच्ची शराब का यह धंधा?
- नवाबगंज में बार-बार वही खेल: क्या छापेमारी ही है इस समस्या का आखिरी हल?
गोंडा। तकनीक के इस दौर में अब कानून के हाथ ‘डिजिटल’ हो गए हैं। गोंडा के नवाबगंज क्षेत्र के दुर्गागंज माझा में आबकारी विभाग और पुलिस ने ड्रोन की मदद से जिस तरह अवैध कच्ची शराब की भट्टी को ध्वस्त किया है, वह काबिले तारीफ है। 500 लीटर शराब और 2000 किलो लहन का नष्ट होना महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन माफियाओं के हौसलों पर करारी चोट है, जो नदी के किनारे अपनी समानांतर अर्थव्यवस्था चला रहे थे।
लेकिन, सवाल व्यवस्था और उसकी जड़ पर है।
यह पहली बार नहीं है जब नवाबगंज के इन्हीं इलाकों में कार्रवाई हुई है। जिला आबकारी अधिकारी प्रगल्भ लवानिया का यह बयान कि “पहले आरोपी सामान लेकर भाग जाते थे” और “जेल से छूटकर आने के बाद लोग फिर वही काम शुरू कर देते हैं”, प्रशासन के माथे पर एक बड़ा कलंक है। यह साफ दर्शाता है कि पुलिस और आबकारी विभाग की अब तक की कार्रवाई महज ‘खानापूर्ति’ साबित हुई है।
अवैध कच्ची शराब का यह कारोबार कोई छिपकर चलने वाला छोटा-मोटा धंधा नहीं है, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है। जब एक ही इलाके में बार-बार वही लोग वही अपराध दोहरा रहे हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि उन्हें कानून का खौफ नहीं है। क्या हमारी कानूनी प्रक्रिया इतनी ढीली है कि अपराधी सजा काटकर आने के बाद भी उसी दुस्साहस के साथ वापस लौट आता है?
ड्रोन का इस्तेमाल करके अपराधियों को पकड़ना आधुनिकता की ओर एक अच्छा कदम है, लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी जब इस पूरे सिंडिकेट की जड़ें खोदी जाएंगी। ड्रोन से तो केवल भट्टी दिखती है, लेकिन उस भट्टी को चलाने वाले ‘संरक्षकों’ को पकड़ने के लिए इच्छाशक्ति की जरूरत है। गोंडा और आसपास के जिलों में इस जहरीले कारोबार की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए केवल छापेमारी काफी नहीं है, बल्कि अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ना और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाना अनिवार्य है।
अब समय आ गया है कि प्रशासन ‘छापेमारी’ के इस रस्म-रिवाज से बाहर निकले और ‘जवाबदेही’ तय करे। नवाबगंज का यह इलाका क्या केवल कच्ची शराब के अड्डे के रूप में ही जाना जाएगा? जनता का भरोसा तभी कायम होगा जब इस बार जेल गए 6 लोगों के साथ-साथ उनके पूरे नेटवर्क और उन्हें शह देने वाले चेहरों को बेनकाब किया जाएगा।
तकनीक ने अपराधियों को ढूंढ निकाला है, अब न्याय को भी उन तक पहुंचना होगा। वरना, कुछ हफ्तों बाद फिर वही ड्रोन उड़ेगा, फिर वही भट्टी जल रही होगी, और फिर वही ढर्रा चलता रहेगा।
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