बस्ती: कप्तानगंज थाना क्षेत्र के भीटा गांव में दबंगों का तांडव, लाठी-डंडों से पीटकर महिला पर जानलेवा हमला

अजीत मिश्रा (खोजी)
न्याय की आस में कराहती बस्ती: खाकी की सरपरस्ती में बेलगाम हुए दबंग, कप्तानगंज थाना क्षेत्र के भीटा गांव की शर्मनाक हकीकत
- खाकी की सरपरस्ती या लापरवाही? भीटा गांव में महिला पर हमले के बाद दुबौला चौकी प्रभारी पर एकपक्षीय कार्रवाई का गंभीर आरोप
- ‘कागजों तक सीमित रहे अपराध नियंत्रण के दावे’, कप्तानगंज पुलिस की कार्यशैली से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
- बस्ती में कानून-व्यवस्था को ठेंगा: न्याय को तरस रहा पीड़ित परिवार, जिम्मेदार अधिकारियों ने साधी चुप्पी
- भीटा गांव कांड: दबंगों को संरक्षण देने का आरोप, उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
बस्ती: जनपद में कानून-व्यवस्था लगातार रसातल की ओर जा रही है। सूबे की सरकार भले ही अपराधियों पर नकेल कसने और महिला सुरक्षा के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की चीख-चीखकर धज्जियां उड़ा रही है। ताजा मामला कप्तानगंज थाना क्षेत्र के भीटा गांव का है, जहां बेखौफ दबंगों ने तांडव मचाते हुए एक महिला पर जानलेवा हमला कर दिया। लाठी-डंडों से पीट-पीटकर महिला को इस कदर घायल किया गया कि आज उसकी जिंदगी अस्पताल के बिस्तर पर संघर्ष कर रही है, और पीड़ित परिवार न्याय की भीख मांगने को मजबूर है।
खाकी की मिलीभगत और एकपक्षीय कार्रवाई के गंभीर आरोप
इस सनसनीखेज वारदात से जहां एक ओर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि दुबौला चौकी प्रभारी ने इस मामले में पूरी तरह से एकपक्षीय कार्रवाई की है। सवाल यह उठता है कि आखिर किस दबाव या शह के चलते पुलिस ने अपराधियों पर शिकंजा कसने के बजाय हाथ बांध लिए?
ग्रामीणों का खुला आरोप है कि दुबौला पुलिस अपराधियों को खुला संरक्षण दे रही है। थाने और चौकियों पर बैठकर अपराध कम करने के लंबे-चौड़े दावे करने वाली पुलिस के इरादे अब केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। धरातल पर स्थिति यह है कि कप्तानगंज पुलिस का खौफ अपराधियों के दिलों से पूरी तरह खत्म हो चुका है, और दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
सुस्त पड़े जिम्मेदार, सवालों के घेरे में महकमा
गंभीर घटना के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सुलगते सवाल छोड़ती है। क्या पुलिस प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? जब कानून के रखवाले ही न्याय का गला घोंटने पर उतारू हो जाएं, तो आम इंसान किससे गुहार लगाए?
भीटा गांव की यह घटना सिर्फ एक महिला पर हमला नहीं है, बल्कि यह बस्ती जिले की पूरी कानून-व्यवस्था पर एक तमाचा है।
त्वरित कार्रवाई की सख्त जरूरत
- निष्पक्ष जांच: इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- दोषी पुलिसकर्मियों पर गाज: एकपक्षीय और संदेहास्पद कार्रवाई करने वाले दुबौला चौकी प्रभारी समेत दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत विभागीय कार्रवाई हो।
- दबंगों की गिरफ्तारी: महिला पर जानलेवा हमला करने वाले सभी नामजद दबंगों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए।
यदि अब भी जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें नहीं खोलीं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण और पीड़ित परिवार सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। जनता अब खोखले आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है—उसे सिर्फ और सिर्फ न्याय चाहिए।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।






