हाई रिस्क प्रेगनेंसी की होगी रियल-टाइम ट्रैकिंग गलत डेटा और लापरवाही पर होगी कार्यवाही – कलेक्टर

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने तथा शून्य आईएमआर और शून्य एमएमआर के लक्ष्य के साथ कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देशन में जिले के सभी ब्लॉक में मैदानी अमले का सघन ओरिएंटेशन व प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसी क्रम में खुरई एवं मालथोन में आयोजित ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य प्रशिक्षण में मैदानी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई तथा सेवाओं में गुणवत्ता लाने हेतु कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा मैदानी स्तर पर बरती जाने वाली सावधानियों, मानक संचालन प्रक्रिया और प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशिक्षण सत्र में स्पष्ट किया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या डेटा मिसमैच की स्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए एएनएम, आशा, सीएचओ एवं ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की गई है। प्रशिक्षण में गलत डेटा प्रविष्टि रोकने, एलएमपी , ईडीडी , एएनसी तथा टीकाकरण का सटीक रिकॉर्ड रखना अनिवार्य बताया गया। इसके साथ ही प्रथम तिमाही (12 सप्ताह) के भीतर गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीयन व पहली एएनसी जाँच पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए गए। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित स्क्रीनिंग कर (बीपी, हीमोग्लोबिन, वजन) उनकी सूची स्वास्थ्य केंद्रों में चस्पा करने तथा जोखिम वाले मामलों में महिलाओं को प्रसव से 7 से 10 दिन पूर्व ही ‘बर्थ वेटिंग रूम’ में भर्ती कराने के निर्देश दिए गए। अत्यधिक गंभीर मामलों (15 दिन के भीतर प्रसव संभावित एचआरपी) को तत्काल जिला चिकित्सालय या मेडिकल कॉलेज रेफर करने को कहा गया है, ताकि प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में समय (गोल्डन टाइम) व्यर्थ न हो। इसके अतिरिक्त, विवाह के तुरंत बाद लक्ष्य दंपत्ति की समग्र आईडी प्राप्त करने, प्रसव पूर्व ई-केवाईसी व डीबीटी लिंक कराने और शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है। मैदानी स्तर पर योग्य दंपतियों से संवाद और प्रसव-पश्चात गृह भेंट के दौरान काउंसलिंग में आशा कार्यकर्ताओं की प्रमुख भूमिका तय की गई है। व्यवस्था की सतत निगरानी हेतु एएनएम, आशा और सीएचओ के कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी तथा आशा सुपरवाइजरों द्वारा यादृच्छिक रूप से गृह भेंट की जांच की जाएगी, जिससे जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा को पूर्णतः सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित अनमोल पोर्टल युविन पोर्टल पर सही समय में, सही तरीके से जांच कर लिया गया सही डेटा दर्ज करने पर भी अत्यधिक जोर दिया गया। क्योंकि भविष्य में सही डेटा प्रविष्टि से ही गर्भवती माता और शिशु का उचित प्रबंध किया जा सकता है। प्रशिक्षण सत्र में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक केवी, एसडीएम सतीश वर्मा , मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर देवेश पटेरिया, जनपद सीईओ श्रीमती मीना कश्यप सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।




