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छत्तीसगढ प्रदेश के आठ प्रमुख शिव जी के मंदिर और की खासियत

02 Aug 2026, 04:37 PM • Vande Bharat Live TV News
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।। पवित्र श्रावण मास की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं ।।

।। वंदेभारतलाइवटीव न्युज, रविवार 02 अगस्त 2026 ।।

गौरैला पेन्ड्रारोड–:: हिंदू धर्म में श्रावण मास का आध्यात्मिक, पूजा आराधना के लिए विशेष महत्व रहता है। श्रावण मास में विशेषकर भगवान भोलेनाथ शिव जी की पूजा आराधना की जाती है। इस महिने में भकतजन भगवान भोलेनाथ शिव जी के दर्शन के लिए विभिन्न मंदिरों में जाते है, पूजा आराधना करतें है। छत्तीसगढ प्रदेश में भी कई ऐसे प्राचीन शिव मंदिर हैं, जहां पर प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्तजन पहुंचतें हैं। छत्तीसगढ प्रदेश के आठ प्रमुख शिव मंदिर हैं,जिनका इतिहास, वास्तुकला, और धार्मिक महत्व भी है। आईए चलते हैं, पवित्र शिव मंदिर , -: 20260802 124951 जलेश्वर धाम का इतिहास लगभग 800 से 900 वर्षों पुराना बताया जाता है। जलेश्वर धाम छग के गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले से सड़क मार्ग होतै हुए करीब 25 किमी. और राजधानी रायपुर से करीब 230 किमी. की दूरी पर है, यहां पर बिलासपुर होते हुए पेन्ड्रारोड से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है। जलेश्वर धाम के निकटतम रेलवे-स्टेशन पेन्ड्रारोड है, जलेश्वर धाम घने जंगलों , पहाड़ियों के बीच में प्राचीन शिव धाम है। यहां पर प्राकृतिक जलस्त्रोत, श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। यहां पर श्रावण मास मे प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तजन पहुंचतें हैं। जलेश्वर धाम मंदिर परिसर में स्थित प्राकृतिक जलकुंड है, जिसकी विशेषता है कि इसका जल वर्ष भर रहता है, सूखता नहीं है। इतिहासकारों के अनुसार जलेश्वर धाम कलचुरी शासनकाल में निर्मित किया गया है।
20260802 124405 हटकेशवर महादेव मंदिर महादेवघाट, रायपुर में स्थित है। रायपुर रेलवे-स्टेशन से करीब 07-08 किमी. और स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से 12 किमी.करीब दूर पड़ता है। यहां पर पहुंचने के लिए ऑटो , टैक्सी, ई रिक्शा, अथवा निजी वाहन से जाया जा सकता है। यह शिव मंदिर खारून नदी के तट पर बसा हुआ है। श्रावण मास में बड़ी संख्या में भक्तगण कांवड़िए जलाभिषेक करने के लिए पहुंचते है। यहां मंदिर में भस्म आरती, महामृत्युंजय मंत्र जाप, रूद्राभिषेक आदि का विशेष आयोजन किया जाता है।
20260802 124043 लक्ष्मणेशवर महादेव का मंदिर खरौद जांजगीर चांपा जिले में स्थित है। राजधानी रायपुर से करीब 120 किमी. की दूरी पर यह मंदिर है। यहां पहुंचने के लिए आरंग शिवरीनारायण के रास्ते करीब दो से ढाई घंटे में पहुंचा जा सकता है। मंदिर पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे-स्टेशन जांजगीर – नैला है जहां से मंदिर की दूरी 35 किमी.के करीब है। इस मंदिर की खासियत है कि खारून स्वयंभू शिवलिंग प्रसिद्ध है। यहां पर विशाल जलहरी भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र है, ऐसी मान्यता है कि जलाभिषेक का जल जलहरी मे ही समा जाता है। यह शिव मंदिर छत्तीसगढ के सबसे पुराने शिव मंदिरों में गिना जाता है। इतिहासकार इस मंदिर को शरभपुरी या फिर प्रारंभिक सोमवंशी शासनकाल से जोङते हैं। ऐसी मान्यता है कि लंका में विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण जी ने यहां पर भगवान शिव जी की आराधना कर प्रायश्चित किया था, और इसी कारण से मंदिर का नाम लक्षमणेशवर मंदिर पड़ा।
20260802 123727 कुलेश्वर महादेव मंदिर छग के राजिम गरियाबंद में स्थित है। राजधानी रायपुर से करीब 45 किमी. की दूरी पर है। यहां पर भनपुर होते हुए सड़क के रास्ते लगभग एक से डेढ़ घंटे में पहुंचा जा सकता है। मंदिर पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे-स्टेशन अभनपुर जहां से करीब 18 किमी. और रायपुर रेलवे-स्टेशन से करीब 45 किमी. दूर है। इस शिव मंदिर की खासियत है – खारून महानदी,पैरी , सोंढूर के त्रिवेणी संगम पर यह मंदिर स्थित है। वर्षा ऋतु में यहां चारों ओर से नदी से घिरा मंदिर अति मनोरम दृश्य लगता है। राजिम कुंभ के समय पर यहां पर देश भर के संत महात्मा और अखाड़े पहुंचतें हैं। वर्तमान मंदिर का संबंध कलचुरी शासनकाल से जुड़ा हुआ मानते हैं। प्राचीन समय में राजिम को छत्तीसगढ का प्रयाग माना जाता रहा है, कुलेश्वर महादेव यहां के प्रमुख आराध्य देव माने जातें है।
20260802 123053 भोरमदेव मंदिर कबीरधाम मे स्थित है। यह मंदिर रायपुर से करीब 140 किमी. की दूरी पर है। यहां मंदिर पहुंचने के लिए कवर्धा होते हुए सड़क के रास्ते पहुंचा जा सकता है। मंदिर के लिए निकटतम रेलवे-स्टेशन राजनांदगांव से करीब 115 किमी. और रायपुर से 135 किमी. दूरी पर है। इस शिव मंदिर की खासियत- यह मंदिर छग का खजुराहो के नाम से जाना जाता है, मंदिर में बारीक पत्थर की नक्काशी, नागर शैली वास्तुकला है। यह शिव मंदिर घने जंगलों पहाड़ों के बीच में है। मंदिर की दिवारों पर अप्सराओं, देवी देवताओ के जीवन से जुड़े हुए शिल्प है, भोरमदेव मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में नागवंशी शासक रामचंद्रदेव के द्वारा करवाया गया था। यह शिव मंदिर छग प्रदेश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों में भी शामिल है।
20260802 122739 मधेश्वर महादेव मंदिर मयाली जशपुर जिले मे स्थित है। यह शिव मंदिर रायपुर से करीब 350 किमी. दूर है। रायगढ़ पत्थलगांव के रास्ते सड़क मार्ग होते हुए पहुंचा जा सकता है। मंदिर जाने के लिए निकटतम रेलवे-स्टेशन रायगढ़ से 135 किमी. और अंबिकापुर से 115 किमी.करीब दूर पड़ता है। इस शिव मंदिर की खासियत- यह शिव मंदिर घने जंगलों पहाड़ियों के बीच में है। एशिया के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंगों मे से एक है। यहा देश भर के कई राज्यों से भक्तजन दर्शन के लिए आतें हैं।
20260802 122441 भूतेशवर महादेव मंदिर गरियाबंद में स्थित है। यह मंदिर रायपुर से करीब 120 किमी. दूर है। मंदिर पहुंचने के लिए अभनपुर गरियाबंद होते हुए मरौदा गांव से करीब ढ़ाई घंटे का रास्ता है। मंदिर के लिए निकटतम रेलवे-स्टेशन रायपुर जंक्शन है। मंदिर की खासियत- यह शिव मंदिर खुले परिसर में स्थित विशाल स्वयंभू शिवलिंग है। मंदिर में बिना छत के खुले आसमान के नीचे शिवजी की पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि शिवलिंग हर साल आकार में थोड़ा थोड़ा बढ़ता है। प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन के लिए दूर दराज क्षेत्रों से भकतजन आतें हैं।
20260802 122038 जलेश्वर महादेव मंदिर बारसूर दंतेवाड़ा में स्थित है। राजधानी रायपुर से मंदिर की दूरी करीब 390 किमी. है। जलेश्वर महादेव मंदिर बारसूर पहुंच। ने के लिए धमतरी कांकेर जगदलपुर होते हुए सड़क के रास्ते जाया जा सकता है। निकटतम रेलवे-स्टेशन जगदलपुर है। इस शिव मंदिर की खासियत- बारसूर के प्राचीन मंदिर समूह का यह एक प्रमुख शिव मंदिर है। आसपास गणेश विष्णु और मामा भांजा जैसे कई प्राचीन मंदिर भी हैं। यह शिव मंदिर विशाल पत्थरों से निर्मित ऐतिहासिक मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण 10वीं 12 वीं शताब्दी मे यहां अनेक भव्य मंदिरों का निर्माण करवाया गया था , जिनमे से एक जलेश्वर महादेव बारसूर मंदिर भी है। विशाल पत्थरों से बनाया गया यह शिव मंदिर बस्तर की प्राचीन परंपरा ,स्थापत्य कला, का अद्भुत उदाहरण भी माना जाता है। बारसूर जलेश्वर महादेव मंदिर कभी चिंदक नागवंशी राजाओं की राजधानी भी हुआ करती थी।

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