बस्ती ज़िले के विकास खंड सल्टौआ परिसर में करोड़ों की लागत से बना कृषि गोदाम/किसान कल्याण भवन दो-ढाई साल में ही पूरी तरह जर्जर हो चुका है.

’भ्रष्टाचार’ की ‘चाशनी’ में डूबा सरकारी तंत्र: 50 साल की उम्र, पर 2 साल में ही जर्जर!
विशेष रिपोर्ट | बस्ती
जिधर भी देखिए, सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अब भवनों की नींव रखने से पहले ही उनके ढहने का समय तय हो जाता है। जिस सरकारी भवन की उम्र कम से कम 50 साल होनी चाहिए, वह महज़ दो से ढाई साल में जर्जर होकर ज़मींदोज़ होने की कगार पर पहुँच जाता है। बस्ती ज़िले का विकास खंड सल्टौआ परिसर इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जहाँ करोड़ों रुपये की लागत से बना ‘कृषि गोदाम / किसान कल्याण भवन’ भ्रष्टाचार की बलि चढ़ चुका है।
उखड़ता प्लास्टर, टूटती खिड़कियाँ और टपकती छतें
भवन की हालत ऐसी है कि उँगली लगाते ही दीवारों का प्लास्टर भरभराकर गिर रहा है। खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं, छतें टपक रही हैं और सीढ़ियाँ जर्जर हैं। स्थिति यह है कि कार्यालय में काम करने वाले कृषि विभाग के कर्मचारी और अधिकारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कर्मचारियों में इतना खौफ है कि वे दफ्तर के अंदर कम और बाहर ज्यादा समय बिताते हैं। खिड़कियों पर शीशे न होने के कारण बंदर आसानी से अंदर घुसकर सरकारी दस्तावेज फाड़ रहे हैं।
- पचास साल की आयु वाले इस भवन की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि उँगली रखते ही दीवारों का प्लास्टर भरभराकर गिर रहा है, खिड़कियों के शीशे टूट गए हैं और छतें टपक रही हैं.
- भवन की खराब हालत के कारण कृषि विभाग के कर्मचारी खुद को बेहद असुरक्षित महसूस करते हैं और कार्यालय के बाहर ही ज्यादा समय बिताते हैं.
- खिड़कियों में शीशे न होने के कारण बंदर कार्यालय के अंदर घुसकर सरकारी कागजों को भी नुकसान पहुँचा रहे हैं.
- कार्यदाई संस्था आरईडी (RED) के अधिकारी दागी ठेकेदार बलराम सिंह पर पूरी तरह मेहरबान हैं, जिसने यह घटिया कृषि भवन बनाया था.
- घटिया निर्माण के बावजूद उसी ठेकेदार को उसी ब्लॉक परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों के आवासीय भवन निर्माण के लिए 5.61 करोड़ रुपये का नया ठेका दे दिया गया है.
- रिपोर्ट में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि ठेकेदार को काम पाने के लिए 20 प्रतिशत से अधिक कमीशन देना पड़ता है तथा एक्सईएन (XEN) और एई (AE) अनुबंध करने से पहले कमीशन लेते हैं.
- हाल ही में जिला अस्पताल में क्रिटिकल गैप निधि से बनाई गई 50 मीटर सड़क एक सप्ताह के भीतर ही टूट गई, जिसे प्रभारी मंत्री के दौरे के दौरान रातों-रात पन्नी बिछाकर ढक दिया गया और नया बता दिया गया.
दागी ठेकेदार ‘बलराम सिंह’ पर विभाग मेहरबान क्यों?
सवाल उठता है कि कार्यदाई संस्था आरईडी (RED) के अधिकारी दागी ठेकेदार बलराम सिंह पर इतने मेहरबान क्यों हैं? घटिया निर्माण के बावजूद ऐसे ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय, उसी परिसर में 5.61 करोड़ रुपये की लागत से अधिकारियों और कर्मचारियों के आवासीय भवन का एक नया ठेका फिर से थमा दिया गया!
बड़ा सवाल: जिस ठेकेदार को पहले ही घटिया निर्माण की लत लग चुकी हो, वह नए भवन को गुणवत्तापूर्ण कैसे बनाएगा? क्या 20 प्रतिशत से अधिक कमीशनखोरी के खेल में अधिकारियों ने जनता के पैसे और कर्मचारियों की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है?
आरईडी (RED) और जिला प्रशासन की साख पर धब्बा
आरईडी के अधिकारियों की लापरवाही और साख इतनी गिर चुकी है कि उनके बनाए भवन और सड़कें चंद दिनों भी नहीं टिकतीं। हाल ही में क्रिटिकल गैप निधि से जिला अस्पताल में बनी 50 मीटर की सड़क एक हफ्ते में ही टूट गई। हद तो तब हो गई जब प्रभारी मंत्री के दौरे के समय रातों-रात उस पर पन्नी (प्लास्टिक/तारकोल) बिछाकर लीपापोती कर दी गई और मरम्मत का झूठा दावा किया गया।
जनहित में तीखे सवाल:
- DAO ने बिना गुणवत्ता जाँच के जर्जर कृषि भवन को टेकओवर कैसे कर लिया?
- 20% से अधिक कमीशनखोरी के लालच में जनसुरक्षा से खिलवाड़ कब तक चलेगा?
- लापरवाह XEN, AE, JE और दागी ठेकेदार पर सख्त कानूनी/विभागीय कार्रवाई कब होगी?
सरकारी खजाने से बहने वाला यह पैसा आम जनता के टैक्स का पैसा है। यदि समय रहते इन ‘कमीशनखोर’ अधिकारियों और ‘दागी’ ठेकेदारों पर नकेल नहीं कसी गई, तो किसी दिन यह जर्जर भवन किसी बड़े हादसे का कारण बनेगा!
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