बस्ती में सख्ती के बाद सिद्धार्थनगर बनी गांजा माफियाओं की नई पनाहगाह, तस्कर दिनेश जायसवाल का नेटवर्क सक्रिय

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में कड़ाई तो सिद्धार्थनगर में शरण ले रहे गांजा माफिया, खाकी की मेहरबानी से फल-फूल रहा दिनेश जायसवाल का साम्राज्य
- भांग की आड़ में गांजे का काला कारोबार: ‘सुविधा शुल्क’ के सहारे फल-फूल रहा कुख्यात दिनेश जायसवाल का साम्राज्य
- बस्ती की तर्ज पर सिद्धार्थनगर में भी हो गांजा माफियाओं पर प्रहार, अंधकार में जा रहा युवाओं का भविष्य
- पूर्व में कई बार जेल जा चुका तस्कर फिर बेखौफ; डुमरियागंज से लेकर इटवा तक फैला ड्रग्स का जाल
सिद्धार्थ नगर।। पड़ोसी जिले बस्ती में पुलिस अधीक्षक डॉक्टर यशवीर सिंह के सख्त तेवर और मादक पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बाद, अपराध की दुनिया के आकाओं ने अपनी राह बदल ली है। बस्ती में नशे के कारोबार पर लगाम कसने और इसके चलते छोटे-छोटे अपराधों में आई भारी कमी के बीच, अब यह नासूर पड़ोसी जनपद सिद्धार्थनगर की युवा पीढ़ी को अपनी आगोश में ले रहा है। बस्ती से खदेड़े गए गांजा तस्करों ने अब सिद्धार्थनगर को अपनी सुरक्षित पनाहगाह बना लिया है, जहां प्रशासनिक सुस्ती और कथित मिलीभगत के चलते इनका नेटवर्क बेखौफ फल-फूल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, सिद्धार्थनगर में इन दिनों गांजा तस्कर दिनेश जायसवाल का आतंक और दायरा दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं। जिले के डुमरियागंज, मोहाना, नौगढ़, बांसी, शोहरतगढ़ और इटवा जैसे प्रमुख इलाकों में फैला इसका नेटवर्क युवाओं की रगों में खुलेआम जहर घोल रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि दिनेश जायसवाल वैध भांग की आड़ में गांजे का अवैध और बड़ा कारोबार संचालित कर रहा है। पूर्व में भी वह कई बार गांजा तस्करी के जुर्म में जेल की हवा खा चुका है, इसके बावजूद उसकी आपराधिक गतिविधियों पर कोई प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है।
इस बेलगाम तस्करी के पीछे स्थानीय थानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अंदरखाने चर्चा है कि थानों के स्तर पर पहुंचने वाले ‘सुविधा शुल्क के डिब्बे’ इस काले कारोबार को खुला संरक्षण दे रहे हैं, जिसके चलते सीमावर्ती जिला होने के बावजूद पुलिस इस कुख्यात तस्कर पर हाथ डालने से कतराती है। नशे की इस गिरफ्त में न केवल कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि सिद्धार्थनगर के मासूम बच्चों और युवाओं का भविष्य भी अंधकारमय होता जा रहा है।
बस्ती की तर्ज पर अब सिद्धार्थनगर में भी कड़े और निर्णायक प्रशासनिक हस्तक्षेप की सख्त जरूरत है। यदि समय रहते पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर और डीआईजी रेंज बस्ती ने इस गिरोह और इसके संरक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, तो नशे का यह दानव आने वाली पूरी पीढ़ी को निगल जाएगा। अब यह देखना लाजिमी होगा कि पुलिस प्रशासन कब नींद से जागता है और कब इन माफियाओं पर कानून का शिकंजा कसा जाता है।
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