बुलढाणा अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी में ₹34.77 करोड़ का घोटाला: पूर्व CEO और प्रबंधक पर FIR दर्ज

समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
पुणे के डेक्कन पुलिस स्टेशन में बुलढाणा अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी (पश्चिम विभाग) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शिरीष दिनकर देशपांडे (68) और पूर्व विभागीय प्रबंधक योगिनी योगेश पोकले (44) के खिलाफ ₹34.77 करोड़ के वित्तीय घोटाले का मामला दर्ज किया गया है। संस्था के वैधानिक लेखापरीक्षक (Auditor) मोहन रघुनाथ दलाल की शिकायत और फॉरेन्सिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
मामले के मुख्य बिंदु
घोटाला किस तरह किया गया (Modus Operandi)
जांच और फॉरेन्सिक ऑडिट के अनुसार, आरोपियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए सोसायटी के नियमों का उल्लंघन किया और वित्तीय हेरफेर को अंजाम दिया:
शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण: आरोपियों ने अपने निजी लाभ के लिए 0% ब्याज दर पर ऋण प्राप्त किया।
बिना बोर्ड मंजूरी के लेनदेन: संचालक मंडल (Board of Directors) की अनुमति के बिना संपत्तियों की खरीद-बिक्री की गई और कर्जदारों के ब्याज माफ किए गए।
बिना गारंटी (Collateral) कर्ज आवंटन: नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी तारण या सिक्योरिटी के बड़ी मात्रा में कर्ज बांटा गया।
फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज: संस्था के संस्थापक अध्यक्ष राधेश्याम चांडक के कथित फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल करके एक निजी कंपनी ('बुलढाणा अर्बन मैनेजमेंट सर्विसेज प्रा. लि.') को सोसायटी की सबसिडियरी दिखाया गया। इस कंपनी को बिनव्याजी एडवांस रकम ट्रांसफर की गई और फर्जी बैलेंस शीट ROC (Registrar of Companies) की वेबसाइट पर अपलोड की गई।
खातों में गड़बड़ी व फंड डायवर्जन: गिरवी रखी गई संपत्तियों की बिक्री से मिला पैसा सोसायटी के खातों में जमा नहीं कराया गया। इसके अलावा, कर्जदारों की सहमति के बिना उनके खातों में अतिरिक्त रकम डालकर उसे अवैध रूप से अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।
अब तक की कार्रवाई
दिसंबर 2025 में सेवा से बर्खास्तगी: शुरुआती वैधानिक ऑडिट में अनियमितता सामने आने के बाद दिसंबर 2025 में ही दोनों अधिकारियों को पद से हटा दिया गया था।
फॉरेन्सिक ऑडिट से खुलासा: बर्खास्तगी के बाद खातों का विस्तृत फॉरेन्सिक ऑडिट कराया गया, जिससे ₹34.77 करोड़ के नुकसान का खुलासा हुआ।
EOW जांच शुरू: शिकायत दर्ज होने के बाद पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के उपनिरीक्षक सुहास पाटील इस मामले की विस्तृत कानूनी व वित्तीय जांच कर रहे हैं।
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