विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन की स्मृति में मनाया गया विश्व बंधुत्व दिवस

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, शाखा – सागर द्वारा स्वामी विवेकानंद जी के 11 सितम्बर 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण की स्मृति में विश्व बंधुत्व दिवस व्याख्यान कार्यक्रम का भव्य आयोजन सिविल लाईन स्थित वरदान होटल के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन एवं स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजेश सिंह, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, सागर, मुख्य वक्ता के रूप में सुश्री रचना जानी, प्रांत संगठक, विवेकानंद केंद्र, मध्यप्रांत, विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती वीणा अग्निहोत्री , प्रधान मजिस्ट्रेट, किशोर न्याय बोर्ड, सागर मंचासीन रहीं तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्मेंद्र शर्मा, नगर संचालक, विवेकानंद केंद्र, सागर ने की। मुख्य वक्ता सुश्री रचना जानी ने कहा कि 11 सितम्बर 1893 को स्वामी जी ने शिकागो में 'मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों' कहकर पूरे विश्व को भारत के विश्व बंधुत्व और सहिष्णुता का संदेश दिया था।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने विश्व को बताया था कि हम सभी धर्मों को सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं। आज जब विश्व में संघर्ष और अशांति है, तब स्वामी जी का 'विश्व बंधुत्व का संदेश हमारे लिए अधिक प्रासंगिक हो गया है।
और आज का युवा ही राष्ट्र के भविष्य का निर्माता हैं। मुख्य अतिथि राजेश सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी विविवेकानंद का भाषण केवल भाषण नहीं था, वह भारत की आत्मा थी।
न्याय और विश्व बंधुत्व की भावना एक ही है ,सबको समान दृष्टि से देखना। यदि हम स्वामी जी के विचारों को अपने जीवन में उतार लें तो समाज में अपराध और भेदभाव स्वयं ही समाप्त हो जाएंगे।
उन्होंने कहा की स्वामी विवेकानंद को ऐसे ऊर्जावान, निडर और समर्पित युवा चाहिए थे जिनका चरित्र मजबूत हो, जिनके शरीर में "लोहे की मांसपेशियां और फौलाद जैसी नसें" हों तथा जिनका मन वज्र के समान दृढ़ संकल्प और उच्च विचारों से परिपूर्ण हो। वे कहते थे कि यदि उन्हें सौ ऐसे सच्चे और विश्वासी युवा मिल जाएं, तो वे देश की पूरी दशा और दिशा बदल सकते हैं।
हम सभी को मिलकर स्वामी जी के कार्य को आगे बढ़ाते हुए देश के युवाओं का पथ प्रदर्शक बनकर उन्हें सही मार्ग दिखलाना है lविशिष्ट अतिथि श्रीमती वीणा अग्निहोत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने नारी शक्ति और युवा शक्ति पर विशेष जोर दिया था। आज के किशोरों को दिशा देने के लिए स्वामी जी के चरित्र निर्माण वाले विचारों की आवश्यकता है।
हमें अपने बच्चों को संस्कार के साथ-साथ सेवा और समर्पण का भाव भी सिखाना होगा। अध्यक्षता कर रहे धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि विवेकानंद केंद्र 'व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र पुनर्निर्माण' के ध्येय के साथ कार्य कर रहा है।
इसी उद्देश्य को लेकर मध्यप्रान्त में "उत्तिष्ठत भारत" युवा प्रेरणा ऑनलाइन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, जिसमे 16 वर्ष से 35 आयु वर्ग के महाविद्यालयीन एवं व्यवसायिक 5 लाख युवाओ को शामिल करके उनमे से 1000 युवाओ को चयनित कर चरित्र निर्माण हेतु प्रशिक्षित किया जायेगा l कार्यक्रम का प्रभावी संचालन संपर्क प्रमुख डॉ आशीष द्विवेदी ने किया, तीन ओमकार प्रार्थना नगर प्रमुख चंद्रप्रकाश शुक्ला, स्वागत उद्बोधन मनोज श्रीवास्तव,गीत शीतल पटैल, विवेक वाणी नैनीका चौरसिया, केंद्र परिचय डॉ महेन्द्र शर्मा व आभार साहित्य प्रमुख प्रदीप शुक्ला द्वारा व्यक्त किया गया l शांति मंत्र गौरव राजपूत ने किया इसी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अनिल तिवारी व विवेकानंद केंद्र के समस्त कार्यकर्ता, बड़ी संख्या में युवा, मातृशक्ति एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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