अमृता फडणवीस के पूजन के 24 घंटे के भीतर एक्शन! चंद्रपुर के महाशिवलिंग मंदिर जीर्णोद्धार मामले में FIR दर्ज

चंद्रपुर से वंदे भारत LIVE TV NEWS के लिए ब्यूरो चीफ समीर वानखेड़े की रिपोर्ट*
चंद्रपुर के प्राचीन महाशिवलिंग मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए पुरातत्व विभाग की अनुमति न लेना अब मंदिर सेवा समिति के लिए मुसीबत बन गया है। पुरातत्व विभाग की शिकायत पर शहर पुलिस ने विशाल महाशिवलिंग मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष शंकर बल्लेपवार के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिससे हड़कंप मच गया है।
खास बात यह है कि महाशिवलिंग के जीर्णोद्धार का काम विधायक किशोर जोरगेवार की पहल और स्व-निधि से किया गया था। इतना ही नहीं, *8 सितंबर को मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फडणवीस ने इसी मंदिर में महाशिवलिंग का पूजन और महारुद्राभिषेक किया था। उसके ठीक एक दिन बाद 9 सितंबर को FIR दर्ज होने से इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।*
*पुरातत्व विभाग ने दी थी नोटिस*
भारतीय पुरातत्व विभाग का आरोप है कि प्राचीन स्थल पर किसी भी तरह के जीर्णोद्धार या निर्माण से पहले विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन समिति ने अनुमति नहीं ली। इस पर विभाग ने अध्यक्ष को काम तुरंत रोकने की नोटिस भेजी थी।
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नोटिस देने के लिए उन्हें अध्यक्ष के पीछे-पीछे घूमना पड़ा। अध्यक्ष द्वारा नोटिस लेने से टालमटोल करने पर अधिकारियों ने निर्माण स्थल पर ही नोटिस चिपका दी। इसके बावजूद काम जारी रहने पर पुरातत्व विभाग ने शहर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि *9 सितंबर को FIR क्रमांक 925* के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि शहर पुलिस थाने में मामला दर्ज होने के बावजूद पुलिस सिर्फ "जांच जारी है" कहकर बात टाल रही है।
विभाग ने इस मामले की जानकारी नागपुर स्थित भारतीय पुरातत्व विभाग को दे दी है और वहां से विस्तृत रिपोर्ट दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेजी जाएगी।
इस मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है कि FIR दर्ज होने के बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने अभी तक FIR की कॉपी ऑनलाइन अपडेट नहीं की है। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर शहर थाने के अधिकारी इस मामले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। आखिर में पुरातत्व विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने ही मीडिया को बताया कि FIR दर्ज हुई है और उसकी कॉपी उनके पास है।
लोक आंदोलन न्यास के नितीन बन्सोड ने भी पुष्टि की कि मंदिर समिति अध्यक्ष के खिलाफ शहर पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ है। बन्सोड ने ही इस अनधिकृत जीर्णोद्धार की शिकायत पुरातत्व विभाग से लेकर जिलाधिकारी, महानगर पालिका और संबंधित विभागों में की थी।
*अब सवाल उठ रहा है कि धार्मिक भावनाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन क्या ऐतिहासिक धरोहर को बचाने वाले नियमों को नजरअंदाज किया जा सकता है?*
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