आजमगढ़ में गाटा संख्या 769 की भूमि पर कथित कब्जे को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत, जांच और कार्रवाई की मांग

आजमगढ़। तहसील बूढ़नपुर क्षेत्र के ग्राम करमहा डींगुरपुर में गाटा संख्या 769, रकबा 0.4530 हेक्टेयर भूमि को लेकर विवाद सामने आया है।
मामले में प्रार्थी ने जिलाधिकारी आजमगढ़ को शिकायत पत्र देकर विपक्षी उदय प्रताप यादव पुत्र केदार यादव पर भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की राजस्व स्तर पर जांच कराकर भूमि को कब्जामुक्त कराने तथा दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि विवादित भूमि राजस्व ग्राम करमहा डींगुरपुर में स्थित गाटा संख्या 769 है, जिसका रकबा 0.4530 हेक्टेयर बताया गया है। प्रार्थी के अनुसार उक्त भूमि पर उसका संक्रमणीय अधिकार है, जबकि विपक्षी द्वारा कथित रूप से अपने प्रभाव एवं दबाव का इस्तेमाल करते हुए भूमि पर कब्जा किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि भूमि से कब्जा हटाने के लिए विपक्षी से कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हुआ। आरोप के मुताबिक विरोध करने पर गाली-गलौज, मारपीट पर आमादा होने तथा प्रार्थी और उसके परिजनों को झूठे मुकदमों में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी गई।
इन आरोपों के चलते शिकायतकर्ता ने भविष्य में किसी अप्रिय घटना और शांति-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई है। मामले को गंभीर बताते हुए शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से खतौनी, खसरा, भू-नक्शा एवं अन्य राजस्व अभिलेखों की जांच, मौके पर राजस्व अधिकारियों से पैमाइश एवं सीमांकन तथा स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जांच में यदि विपक्षी का कब्जा अनधिकृत पाया जाता है तो नियमानुसार कब्जा हटाकर प्रार्थी को भूमि का वास्तविक एवं भौतिक कब्जा दिलाया जाए। इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने कथित धमकी और दबाव के आरोपों की पुलिस स्तर से जांच कराने तथा आरोप सत्य पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
संभावित शांति-भंग को देखते हुए आवश्यक निरोधात्मक कार्रवाई किए जाने का भी अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध राजस्व एवं पुलिस कानूनों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। भूमि पर वास्तविक अधिकार और कब्जे की स्थिति राजस्व अभिलेखों तथा प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
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