राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ पर बीजेपी का ‘लाड़ला’ स्ट्रोक… भाजपा ने की युवाओं से रील बनाने की अपील

इंदौर / तेजकुमार जारवाल /वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़/ जिला रिपोर्टर, इंदौर, मध्य प्रदेश,
मध्यप्रदेश की राजनीति में 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से दिखाई देने लगी है। अब तक चुनावी राजनीति में लाड़ली बहना योजना के जरिए महिला वोट बैंक को साधने की कोशिशों के बीच क्या आने वाले चुनाव में लाड़ले-लाड़लियां यानी युवा वोटर सत्ता की दिशा तय करेंगे?
राजनीतिक दलों की मौजूदा गतिविधियां तो इसी ओर इशारा कर रही हैं। 2028 के विधानसभा चुनाव तक मध्यप्रदेश में युवा मतदाताओं की संख्या करीब 1 करोड़ 41 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।
यही वजह है कि चुनाव से करीब सवा दो साल पहले ही बीजेपी और कांग्रेस दोनों की नजर इस बड़े वोट बैंक पर टिक गई है। खासकर बीजेपी Gen Z तक पहुंच बनाने के लिए पारंपरिक प्रचार से आगे बढ़कर सोशल मीडिया रील्स बनाने जैसे तरीकों पर जोर दे रही हैं।
यूथ से बूथ तक पहुंचने की तैयारी
मध्यप्रदेश में अब सियासी रणनीति का एक बड़ा फोकस यूथ से बूथ तक पहुंच बनाने पर दिखाई दे रहा है। बीजेपी युवा मोर्चा सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से जुड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
वहीं कांग्रेस भी युवा मुद्दों और छात्र राजनीति के जरिए अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी कड़ी में 19 सितंबर को राहुल गांधी इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए युवाओं और छात्रों से संवाद करेंगे।
रोजगार, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों के जरिए कांग्रेस युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। बीजेपी ने रील को बनाया सियासी हथियार
युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए बीजेपी का युवा मोर्चा सोशल मीडिया को बड़ा माध्यम बना रहा है।
संगठन की ओर से अलग-अलग विषयों पर 60 से 90 सेकंड की रील प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इसमें युवाओं को अपनी बात रचनात्मक तरीके से रखने का मौका दिया जा रहा है।
प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाली रील के लिए 1 लाख रुपए तक के पुरस्कार का प्रावधान रखा गया है। बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के मुताबिक युवा इस पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
18 से 25 वर्ष के युवाओं के लिए रील के साथ स्पीच सहित कई तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं और प्रतिभागियों को प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। निकाय चुनाव में भी युवाओं को ज्यादा मौका?
2028 की बड़ी चुनावी लड़ाई से पहले होने वाले निकाय चुनावों को भी बीजेपी युवा नेतृत्व की नई जमीन तैयार करने के तौर पर देख रही है। पार्टी की कोशिश ज्यादा से ज्यादा युवाओं को चुनावी राजनीति में अवसर देने की है।
पार्षद से लेकर महापौर तक के पदों पर युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हो रही है। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि पार्टी की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को अवसर मिले।
उनका कहना है कि निकाय चुनाव से लेकर विधानसभा तक युवा नेताओं को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। राहुल गांधी के कार्यक्रम के बीच नितिन नवीन और भागवत का दौरा
युवाओं को लेकर राजनीतिक सक्रियता के बीच सितंबर में मध्यप्रदेश का सियासी कैलेंडर भी खासा दिलचस्प हो गया है।
राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर में छात्रों के बीच होंगे, तो इससे ठीक पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन इंदौर और उज्जैन के दौरे पर रहेंगे। वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत भी उज्जैन में युवा धर्म संसद से जुड़ेंगे।
इन कार्यक्रमों की टाइमिंग को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर बीजेपी में घबराहट है।
उनका कहना है कि राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने से पहले और उसके आसपास बीजेपी और संघ से जुड़े बड़े नेताओं के कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि युवाओं के बीच राहुल गांधी की बढ़ती स्वीकार्यता बीजेपी के लिए चिंता का कारण है।
बीजेपी बोली-भागवत का कार्यक्रम पहले से तय
कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी का कहना है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत का उज्जैन दौरा पहले से तय कार्यक्रम का हिस्सा है। बीजेपी के मुताबिक युवा धर्म संसद का आयोजन राहुल गांधी के कार्यक्रम को देखते हुए नहीं किया गया है।
बीजेपी का तर्क है कि मोहन भागवत देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं और सामाजिक विषयों से जुड़े कार्यक्रमों में लगातार शामिल होते रहे हैं। इसलिए इसे कांग्रेस के कार्यक्रम से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
2028 में बदल सकता है वोटिंग पैटर्न? मध्यप्रदेश की राजनीति में महिला वोट बैंक को मजबूत करने वाली लाड़ली बहना योजना का असर विधानसभा चुनाव 2023 के बाद से लगातार राजनीतिक चर्चा में रहा है।
अब राजनीतिक दलों का फोकस युवा वोटर पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। करीब 1 करोड़ 41 लाख संभावित युवा मतदाताओं के बीच 2028 तक पहुंच बनाने की यह होड़ सिर्फ चुनावी प्रचार तक सीमित नहीं है।
सोशल मीडिया, रील प्रतियोगिताएं, युवा संवाद, निकाय चुनाव में नए चेहरों को मौका और छात्र मुद्दों पर सीधी राजनीति, ये सभी संकेत बताते हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में युवा वोटर को साधना सत्ता की लड़ाई का बड़ा केंद्र बन सकता है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि 2028 में मध्यप्रदेश की चुनावी तस्वीर लाड़ली बहना के वोट बैंक से आगे बढ़कर लाड़ले-लाड़लियों यानी युवा मतदाताओं के फैसले से कितनी बदलेगी?
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