बस्ती: डीटीआई कटरा में ड्राइविंग टेस्ट पास कराने के नाम पर ₹2,000 की अवैध वसूली का सनसनीखेज आरोप

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती के डीटीआई कटरा में भ्रष्टाचार का खेल: ड्राइविंग टेस्ट पास कराने के नाम पर ₹2,000 मांगने का सनसनीखेज आरोप और प्रशासन की चुप्पी
🎯किसके आदेश पर चल रहा है खेल? डीटीआई में निजी कर्मचारियों की दखलअंदाजी और प्रशासनिक चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
🎯रिश्वत न देने पर रोकी गई लाइसेंस प्रक्रिया, सड़क सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे भ्रष्टाचारी
🎯ड्राइविंग टेस्ट सेंटर पर बिचौलियों का राज: सेंसर फेल होने की आड़ में मैनुअल वसूली का खेल उजागर
🎯शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं? बस्ती प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए बड़े सवाल
बस्ती।। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गहरे संदेह के घेरे में आ गई है। डीटीआई (Driving Testing Institute) कटरा, बस्ती में ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट के नाम पर अवैध वसूली का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक तरफ जहां सरकार पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था का दावा करती है, वहीं जमीनी हकीकत इसके उलट भ्रष्टाचार के दलदल में धंसी नजर आ रही है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक आवेदक ने निर्धारित सरकारी राजस्व शुल्क के रूप में ₹1,000 जमा करने के बाद अपना ड्राइविंग टेस्ट दिया था। आरोप है कि टेस्ट के दौरान आवेदक से अतिरिक्त ₹2,000 की मांग की गई। जब आवेदक ने इस अवैध मांग को पूरा करने से इनकार कर दिया, तो उसकी लाइसेंस बनवाने की पूरी प्रक्रिया को ताक पर रखकर रोक दिया गया।
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला पहलू रितेश चौधरी नामक व्यक्ति का नाम सामने आना है, जिन्हें मारुति कंपनी का निजी कर्मचारी बताया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि एक निजी कंपनी से जुड़ा व्यक्ति सरकारी परिसर (डीटीआई) में बैठकर ड्राइविंग टेस्ट लेने का अधिकार कैसे और किस आदेश के तहत प्राप्त किए हुए है?
उठे गंभीर सवाल और व्यवस्था की पोल
यह मामला केवल एक व्यक्ति से पैसों की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है। इस घटना ने निम्नलिखित बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
⚡अधिकार पत्र का अभाव: रितेश चौधरी किस शासकीय आदेश या अनुबंध के तहत डीटीआई कटरा में ड्राइविंग टेस्ट ले रहे हैं? परिवहन विभाग को अपना आधिकारिक पत्र सार्वजनिक करना चाहिए।
⚡सेंसर व्यवस्था बनाम मैनुअल खेल: जब पूरी ड्राइविंग टेस्ट प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सेंसर-आधारित और ऑनलाइन प्रणाली लागू की गई है, तो ‘सेंसर खराब होने’ का बहाना बनाकर मैनुअल टेस्ट की अनुमति किसके इशारे पर दी जा रही है?
⚡निजी कर्मचारियों की दखलअंदाजी: सरकारी कार्यालय में निजी व्यक्तियों की बेरोक-टोक आवाजाही, आवेदकों से सीधे संपर्क और टेस्ट की निगरानी करने की अनुमति किसने दी?
अतिरिक्त वसूली का खेल: जब तय शुल्क पहले ही जमा है, तो किस मद में और किसकी शह पर अतिरिक्त रकम वसूली जा रही है?
सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया का सीधा संबंध आम नागरिकों की सुरक्षा और सड़क अनुशासन से है। यदि पैसे के बल पर अयोग्य और गैर-दक्ष ड्राइवरों को लाइसेंस बांटे जाएंगे, तो वे कल सड़कों पर निर्दोष लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा साबित होंगे। यह स्थिति न केवल कानून का मखौल उड़ाती है, बल्कि सड़क सुरक्षा अभियानों की भी धज्जियां उड़ाती है।
निष्कर्ष और तीखी मांग
भले ही इन आरोपों की गहराई से जांच की आवश्यकता है, लेकिन स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होना और चुप्पी साधे रखना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
जनता और जागरूक नागरिकों की मांग है कि:
⚡निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच: डीटीआई कटरा में चल रही पूरी टेस्ट प्रक्रिया और निजी कर्मचारियों की भूमिका की तत्काल पारदर्शी जांच हो।
⚡कार्रवाई की सार्वजनिक रिपोर्ट: अवैध वसूली और नियमों की अनदेखी के दोषियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करते हुए उसकी स्थिति को सार्वजनिक किया जाए।
⚡पारदर्शिता की पुनर्स्थापना: यह स्पष्ट किया जाए कि भविष्य में ऐसे बिचौलियों और निजी व्यक्तियों का दखल सरकारी टेस्ट सेंटर्स पर पूरी तरह से प्रतिबंधित कैसे होगा।
यदि प्रशासन इस गंभीर मामले पर अब भी पर्दा डालने की कोशिश करता है, तो यह माना जाएगा कि भ्रष्टाचारियों को खुला संरक्षण प्राप्त है। बस्ती की जनता अब जुबानी आश्वासनों से नहीं, बल्कि ठोस और कड़ी कार्रवाई देखना चाहती है।
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