कॉलेज-हॉस्टलों में बनेंगी नशामुक्ति समितियां और नशामुक्ति मित्र, जिम्मेदारी के साथ जागरूकता और कड़ी निगरानी ही नशा निवारण का मूल मंत्र – कलेक्टर प्रतिभा पाल

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा गुरुवार को रवींद्र भवन में जिला स्तरीय नशामुक्ति कार्यशाला का आयोजन किया गया। "SAY NO TO DRUGS – हमारा है यही संदेश, नशा-मुक्त हो मध्य प्रदेश" के मुख्य ध्येय वाक्य के साथ आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना और उन्हें स्वस्थ, नशामुक्त जीवन की ओर प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी अधिकारियों, शिक्षकों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई गई। कार्यशाला में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कहा कि नशे की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए सप्लाई चेन को तोड़ने के साथ-साथ जागरूकता, निगरान और रोकथाम पर विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने सभी कॉलेज और हॉस्टलों में अनिवार्य रूप से 'नशामुक्ति समितियों' का गठन करने तथा 'नशामुक्ति मित्र' बनाने के निर्देश दिए। ये समितियां परिसरों में संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखेंगी और समन्वय स्थापित करेंगी।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि नशीली गतिविधियों की सूचना मिलते ही तत्काल संस्थान और प्रशासन को सूचित किया जाए। उन्होंने बताया कि पुलिस प्रशासन द्वारा एनडीपीएस एक्ट के तहत लगातार कठोर वैधानिक कार्रवाइयां की जा रही हैं।
परन्तु हमें अपने स्तर पर भी चौकन्ना रहकर अपने संस्थान/ कैंपस/विशेष रूप से समाज के युवाओं को नशे से न केवल बचाना है बल्कि यदि कोई व्यक्ति नशे की लत से ग्रसित है तो उसे संवेदनशीलता के साथ काउंसलिंग और आवश्यक रिहैबिलिटेशन उपलब्ध कराएं। हमे अपने परिवार, सामाजिक स्तर पर नशामुक्ति के लिए सामाजिक प्रयास करने होंगे और निश्चित रूप से हम अपने कैंपस, हॉस्टल को नशे के दुष्प्रभावों से बचा पायेंगे।
उन्होंने भारत सरकार द्वारा बनाया गया कोटपा कोटपा एक्ट, 2003 (सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम" Cigarettes and Other Tobacco) Products) का उल्लेख करते हुए बताया कि एक्ट का मुख्य उद्देश्य देश में तंबाकू के सेवन को कम करना और जन स्वास्थ्य की रक्षा करना है। एक्ट के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध (धारा 4) जैसे ऑफिस, अस्पताल, शिक्षण संस्थान, होटल, रेस्तरां और सार्वजनिक परिवहन जैसे स्थानों पर धूम्रपान करना पूरी तरह वर्जित है।
नियम तोड़ने पर 200 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। अतः सभी प्रिंसिपल, वॉर्डन आवश्यक कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।
पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल पुलिस कार्रवाई से नशामुक्ति संभव नहीं है; इसके लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि नशे से ही अपराध पनपते हैं, जो सामाजिक विघटन का कारण बनते हैं।
पुलिस विभाग द्वारा स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास 'नशा-फ्री ज़ोन' बनाए जा रहे हैं और अवैध मादक पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ सख्त मुहिम चलाई जा रही है। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान से बहन कल्पना जी ने कहा कि नशा एक मनोरोग है, जिसकी शुरुआत मन के विचारों से होती है।
नशे से ग्रसित व्यक्ति से घृणा करने के बजाय नशा करने की प्रवृत्ति और उसके कारणों को समझकर दृढ़ मनोबल से इसका निवारण किया जाना चाहिए। इसी प्रकार गायत्री परिवार से श्री तनुज पांडे ने बताया कि गायत्री परिवार बाल संस्कार शालाओं और जागरूकता परीक्षाओं के माध्यम से वर्षों से नशामुक्ति के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है।
कार्यशाला में एएसपी जयवीर सिंह भदौरिया ने पीपीटी के माध्यम से बताया कि जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक 'नशामुक्ति भारत अभियान' व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। पुलिस द्वारा "नशे से दूरी है जरूरी" अभियान के तहत तस्करों और अवैध स्रोतों पर कड़ा शिकंजा कसा जा रहा है।
राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने नशे को एक मानसिक बीमारी घोषित किया है, जिसका सही इलाज संभव है। देश में लगभग 22 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं।
उन्होंने सभी प्रतिभागियों से 'मास्टर ट्रेनर' बनकर समाज में नशामुक्ति के दूत के रूप में कार्य करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय विद्यालय के हिमांशु पांडे ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नशा त्यागना स्वयं से स्वयं की लड़ाई है, यह कठिन है पर असंभव नहीं।
इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री, अपर कलेक्टर अविनाश रावत सहित प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक , संचालक, वॉर्डन आदि मौजूद थे।
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