बाल नवाचारकर्ता अर्जुन उपाध्याय ने बनाया ‘Impact OS’ वेब पोर्टल एवं ऐप, बेंगलुरु में मिला ‘यंग इनोवेटर’ सम्मान

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * पानी की गुणवत्ता, वायु प्रदूषण, मौसम और जर्जर इमारतों से संबंधित जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की पहल, आर्मी पब्लिक स्कूल, सागर में कक्षा छठवीं के छात्र अर्जुन उपाध्याय ने तकनीक के माध्यम से शहरी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक अभिनव पहल की है। अर्जुन ने ‘Impact OS’ नामक वेब पोर्टल एवं ऐप विकसित किया है, जिसका उद्देश्य पानी की गुणवत्ता, वायु गुणवत्ता, मौसम और जर्जर इमारतों जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है।
इस नवाचार के लिए अर्जुन को बेंगलुरु में आयोजित हैक फेस्ट में ‘यंग इनोवेटर’ के सम्मान से नवाजा गया। अर्जुन ने बताया कि इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और दिल्ली में जर्जर इमारतों से जुड़ी घटनाओं ने उन्हें इस परियोजना को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करते हुए नगर निगमों, स्थानीय प्रशासन, जल परीक्षण प्रयोगशालाओं और मौसम एवं वायु गुणवत्ता से संबंधित सार्वजनिक सूचना पोर्टलों पर उपलब्ध जानकारी को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकत्रित करने का प्रयास किया है। इससे विभिन्न स्रोतों की जानकारी एकीकृत डैशबोर्ड पर देखी जा सकती है।
परियोजना का उद्देश्य नागरिकों को उनके आसपास के पर्यावरण और शहरी सुविधाओं से संबंधित उपयोगी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है। ‘Impact OS’ की परिकल्पना के अंतर्गत उपयोगकर्ता अपने आसपास के क्षेत्र की पानी और हवा की गुणवत्ता, मौसम तथा अन्य शहरी सुविधाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
इसमें नगर निकायों द्वारा की जाने वाली जल आपूर्ति, ऊर्जा संसाधनों, बिजली एवं सौर ऊर्जा के उपयोग और पौधरोपण से संबंधित आंकड़ों को एक स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, नगर निकाय द्वारा किसी जर्जर भवन के संबंध में नोटिस जारी किए जाने पर संबंधित जानकारी और अलर्ट उपलब्ध कराने की सुविधा भी प्रस्तावित है।
इस प्रकार, यह प्लेटफॉर्म शहरी सेवाओं से जुड़ी जानकारी को अधिक सुलभ बनाने और नागरिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है। अर्जुन की तकनीकी यात्रा आठ वर्ष की उम्र में शुरू हुई, जब उनके पिता ने उन्हें अपना पुराना लैपटॉप दिया।
लैपटॉप में सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर से संबंधित समस्याओं को ठीक करने के प्रयास में उनकी कंप्यूटर के प्रति रुचि बढ़ी। इसके बाद उन्होंने YouTube वीडियो की सहायता से प्रोग्रामिंग और कोडिंग सीखना शुरू किया।
स्कूल की एक प्रतियोगिता के लिए ऐप बनाने के दौरान मिले प्रोत्साहन ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। लगभग आठ महीने की मेहनत और स्कूल के शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने ‘Impact OS’ विकसित किया।
अर्जुन के पिता डॉ. चंद्रमा प्रकाश उपाध्याय डॉ.
हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी माता डॉ. देवांशी उपाध्याय DST वुमन साइंटिस्ट हैं।
इस अनुप्रयोग को और अधिक उन्नत एवं उपयोगी बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। इस प्रयास में अर्जुन के सहपाठी अर्णव निरंजन भी सहयोग कर रहे हैं।
अर्जुन ने अपने विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर सहयोग, प्रोत्साहन और उचित मार्गदर्शन के कारण ही इस नवाचार को विकसित करना और आगे बढ़ाना संभव हो पाया है। उन्होंने अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन को अपनी इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया।
अर्जुन अब अपने ऐप को Google Play Store पर उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहे हैं। उनका यह प्रयास दर्शाता है कि जिज्ञासा, निरंतर सीखने की इच्छा और तकनीक के रचनात्मक उपयोग से विद्यार्थी भी समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में नवाचार कर सकते हैं।
‘Impact OS’ शहरी सुविधाओं और पर्यावरण से जुड़ी जानकारी को एकीकृत रूप में उपलब्ध कराने की उनकी इसी सोच का परिणाम है।
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