आगर-मालवा। हौसले बुलंद हों तो शारीरिक चुनौतियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी हों, दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर उन्हें अवसर में बदला जा सकता है। इसकी मिसाल हैं आगर विकासखंड के ग्राम पिपलोनकलां निवासी रफीक खान, जिन्होंने दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने पत्रकारिता को जनसेवा का माध्यम बनाया और क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर आमजन की आवाज प्रशासन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है।
*सरकारी योजनाओं ने दी उड़ान, आत्मनिर्भरता को मिले पंख*
रफीक खान के इस सफर में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से उन्हें तीन पहिया बैटरी चलित साइकिल उपलब्ध कराई गई। इसके बाद विभागीय शाखा प्रभारी के सहयोग से उन्हें व्हीलचेयर का लाभ भी मिला।
इन सहायक उपकरणों ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने के साथ क्षेत्र में सक्रिय रहने की राह भी सुगम की। अब वे अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद दैनिक कार्यों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रहे हैं और क्षेत्र में भ्रमण कर लोगों की समस्याओं को सामने लाने में जुटे हैं।
*पत्रकारिता के जरिए बन रहे आमजन की आवाज*
रफीक खान केवल अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। पिपलोनकलां क्षेत्र की जनसमस्याओं, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़े मामलों को पत्रकारिता के माध्यम से प्रमुखता से उठाकर वे आम लोगों की आवाज प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं।
विभागीय सहायता मिलने से उनकी कार्यक्षमता में और वृद्धि हुई है। इससे वे अधिक सक्रियता के साथ जनहित के मुद्दों पर काम कर पा रहे हैं। रफीक खान ने इस सहयोग के लिए शासन और सामाजिक न्याय विभाग के प्रति आभार जताया है।
*दूसरे दिव्यांगजनों के लिए बने प्रेरणा*
रफीक खान की कहानी इस बात का प्रमाण है कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की क्षमता, प्रतिभा और समाज के लिए कुछ करने के जज्बे को सीमित नहीं कर सकती। जरूरत है अवसर, सहयोग और आत्मविश्वास की। शासकीय योजनाओं से मिले संबल के सहारे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते रफीक खान आज जिले के अन्य दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
उनका संघर्ष और जनसेवा के प्रति समर्पण संदेश देता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो व्यक्ति न केवल अपनी राह बना सकता है, बल्कि दूसरों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है।