अमेरिका से छत्तीसगढ़ पहुँच रहे हैं आगोरा एकोटूरिज्म की विशेष ज्ञान आधारित यात्रा करने

अमेरिका से छत्तीसगढ़ पहुँच रहे हैं आगोरा एकोटूरिज्म की विशेष ज्ञान आधारित यात्रा करने
औषधिय वनस्पतियों का ज्ञान लेने अमेरिका से पहुंचे दो विदेशी अतिथि छत्तीसगढ़ के दुगली में
रिपोर्टर मिथलेश पटेल
3 नवंबर 2026 धमतरी
आगोरा एकोटूरिज्म की विशेष ज्ञान आधारित यात्रा में बस्तर,धमतरी और कबीरधाम के आदिवासी समुदायों की उपचार परंपराओं को करीब से जाना। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों एवं औषधिय वनस्पतियों के अनमोल ज्ञान को समझने के उद्देश्य से अमेरिका से चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े दो अतिथि छत्तीसगढ़ पहुंचे। आगोरा एकोटूरिज्म द्वारा आयोजित विशेष ज्ञान आधारित यात्रा के दौरान अमेरिका अतिथियों ने प्रदेश के बस्तर, धमतरी और कबीरधाम जिलों के आदिवासी समुदायों के बीच पहुंचकर उनकी पारंपरिक उपचार पद्धतियों, औषधिय पौधों तथा स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं की जानकारी प्राप्त की ।
आगोरा एकोटूरिज्म के संस्थापक डॉ आलोक कुमार साहू के नेतृत्व में आयोजित इस विशेष यात्रा में अतिथियों ने बस्तर, के धुरवा समुदाय धमतरी जिले के दुगली क्षेत्र के पारंपरिक वैद्यों तथा कबीरधाम क्षेत्र के बैगा समुदाय के साथ समय बिताया। इस दौरान उन्होंने आदिवासी समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होते आ रहे, वनस्पति ज्ञान प्राकृतिक संसाधनों के पारंपरिक उपयोग और प्रकृति आधारित उपचार पद्धतियों को नजदीक से समझा। यात्रा के दौरान धमतरी जिले के दुगली क्षेत्र में डॉ आशीष कुमार साहू एवं डॉ अखिलेश्वर कुमार साहू ने अतिथियों का स्थानीय पारंपरिक वैद्यों से परिचय कराया।
इस अवसर पर पारंपरिक वैद्यों के साथ विशेष संवाद आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न औषधिय वनस्पतियों की पहचान, उनके पारंपरिक उपयोग स्थानीय उपचार संबंधी अनुभवों तथा इस अमूल्य ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की परंपरा पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर डॉ आशीष कुमार साहू (आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी ) ने चर्चा के दौरान बताया कि छत्तीसगढ़ को हर्बल स्टेट के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है
दुगली जैसे वनांचल क्षेत्र में सदियों से अनेक महत्वपूर्ण औषधिय वनस्पतियां प्राकृतिक रूप से मौजूद है । यहां के स्थानीय पारंपरिक वैद्य अपने अनुभव और पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान के आधार पर इन वनस्पतियों की पहचान तथा उनके पारंपरिक उपयोग की जानकारी रखते हैं ।यह ज्ञान हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है , जिसे संरक्षित करना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसका दस्तावेजीकरण करना आज की आवश्यकता है
उन्होंने कहा है कि आदिवासी समुदायों का प्रकृति के साथ गहरा संबंध रहा है। जंगल पेड़ – पौधे और वनस्पतियां उनके जीवन एवं पारंपरिक स्वास्थ्य व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं। ऐसे ज्ञान को पहचाना दिलाने के साथ-साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी जरूरी है
इस यात्रा के माध्यम से अमेरिका से आए अतिथियों को छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति, स्थानीय परंपराओं और प्राकृतिक संपदा को समझने का महत्वपूर्ण अवसर मिला । वहीं दुगली क्षेत्र के पारंपरिक वैद्यों ने अनुभव एवं ज्ञान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिचित कराने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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