भारत-नेपाल सीमा पर ठूठीबारी पुलिस और एटीएस की संयुक्त टीम ने गांजा तस्करी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

सीमा पर सफेदपोश और खाकी का नेक्सस या सिर्फ नशे का कारोबार? 70 लाख के गांजे के साथ पकड़े गए तस्कर!
— भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई, एक महिला समेत दो गिरफ्तार
— कुशीनगर के शातिर तस्करों का महराजगंज में चल रहा था काला खेल
- 70 लाख का गांजा बरामद: तस्करों के कब्जे से 1 क्विंटल 22 किलो 975 ग्राम अवैध गांजा जब्त, जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 70 लाख रुपये है।
- एक महिला समेत दो गिरफ्तार: कुशीनगर के रहने वाले नैमुन निशा उर्फ जहांतारा और राजेन्द्र गौड़ उर्फ रविन्द्र को किया गया गिरफ्तार।
- स्कॉर्पियो वाहन जब्त: तस्करी में इस्तेमाल की जा रही लग्जरी स्कॉर्पियो गाड़ी को पुलिस ने अपने कब्जे में लिया।
- शामिल रहा पुराना आपराधिक इतिहास: मुख्य आरोपी राजेन्द्र गौड़ के खिलाफ पहले से ही कुशीनगर और बस्ती जिलों में एनडीपीएस अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज हैं।
महराजगंज: भारत और नेपाल की खुली सीमाएं देश की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य के लिए किस कदर नासूर बनती जा रही हैं, इसकी एक बानगी महराजगंज जिले में देखने को मिली है। ठूठीबारी पुलिस और एटीएस (सिद्धार्थनगर-गोरखपुर) की संयुक्त टीम ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत 1 क्विंटल 22 किलो से अधिक अवैध गांजे के साथ एक महिला समेत दो तस्करों को दबोचने में सफलता पाई है। बरामद गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 70 लाख रुपये आंकी गई है। सवाल यह है कि आखिर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से चलकर यह नशे की खेप महराजगंज के रास्ते नेपाल सीमा तक कैसे बेखौफ पहुंच रही थी? क्या सीमा पर तैनात सुरक्षा तंत्र सिर्फ कागजी दावों तक सीमित है?

स्कॉर्पियो की आड़ में चलता था मौत का यह काला धंधा
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुशीनगर जिले के चैनपट्टी (थाना तरयां सुजान) की रहने वाली नैमुन निशा उर्फ जहांतारा और सेवरही के वार्ड नंबर 7 निवासी राजेन्द्र गौड़ उर्फ रविन्द्र के रूप में हुई है। ये शातिर अपराधी लग्जरी गाड़ी (स्कॉर्पियो संख्या UP32LB-9957) का इस्तेमाल कर पुलिस और खुफिया तंत्र की आँखों में धूल झोंकने की फिराक में थे। लेकिन मुखबिर की सटीक सूचना और संयुक्त टीम की मुस्तैदी ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
पुराना अपराधी, फिर भी बेखौफ!
इस मामले का सबसे डरावना पहलू यह है कि मुख्य आरोपी राजेन्द्र गौड़ का आपराधिक इतिहास कोई नया नहीं है। वर्ष 2020 में कुशीनगर के विशुनपुरा थाने में और वर्ष 2023 में बस्ती जिले के रुधौली थाने में इसके खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम (NDPS Act) के तहत मुकदमे दर्ज हैं। जब एक पुराना और शातिर अपराधी पहले से ही एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त रहा हो, तो वह जमानत पर बाहर आकर फिर से इतने बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी को कैसे अंजाम दे रहा था? क्या कानून के हाथ वाकई इतने छोटे हैं कि आदतन अपराधी बार-बार जेल से छूटकर समाज की रगों में जहर घोलते रहते हैं?
युवा पीढ़ी को खोखला करने की साजिश
यह पहली बार नहीं है जब भारत-नेपाल सीमा पर इस तरह की खेप पकड़ी गई हो। सीमावर्ती इलाके लंबे समय से तस्करी का सेफ जोन बनते जा रहे हैं। कभी सोने की तस्करी, कभी नकली नोट और अब करोड़ों का गांजा—यह साफ दर्शाता है कि सीमा सुरक्षा और स्थानीय खुफिया तंत्र में कहीं न कहीं गहरी चूक या मिलीभगत है। तस्कर समाज के युवाओं को नशे की गर्त में धकेलकर अपनी तिजोरियां भरने में लगे हैं।
ठूठीबारी पुलिस और एटीएस की यह संयुक्त कार्रवाई सराहनीय जरूर है, जिसके लिए थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह और उनकी टीम बधाई की पात्र है। परंतु, इस कार्रवाई को सिर्फ एक ‘सफलता’ मानकर इतिश्री नहीं की जानी चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि इस सिंडिकेट की जड़ों तक पहुँचा जाए—यह पता लगाया जाए कि यह माल कहाँ से लोड हुआ था और इसकी डिलीवरी नेपाल या अन्य किन इलाकों में होनी थी। जब तक इस पूरे नेक्सस के मुख्य सरगनाओं और संरक्षकों को बेनकाब करके सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक इस तरह के तस्कर कानून की आँखों में धूल झोंकते रहेंगे।
अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले की गहराई से तहकीकात कर इस रैकेट के बाकी चेहरों को बेनकाब कर पाती है या मामला सिर्फ दो मोहरों की गिरफ्तारी तक ही सिमट कर रह जाता है।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।







