

*गोरखपुर। “मुर्दों की ज़मीन पर सौदेबाज़ी?” गोरखपुर के ईसाई कब्रिस्तान को लेकर बड़ा खुलासा, चर्च संपत्ति विवाद ने मचाया हड़कंप*
गोरखपुर। गोरखपुर स्थित एक पुराने ईसाई कब्रिस्तान की भूमि को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) से जुड़े प्रॉपर्टी ऑफिसर मॉरिस क्लाइमेंट पर कब्रिस्तान की जमीन को कथित रूप से बेचने, अवैध सौदेबाज़ी करने और मोटी रकम लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यह मामला सामने आने के बाद ईसाई समुदाय में भारी रोष व्याप्त है और चर्च संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों का दावा है कि संबंधित भूमि वर्षों से ईसाई समुदाय के अंतिम संस्कार और दफन क्रिया के लिए उपयोग में लाई जाती रही है। आरोप है कि इसी पवित्र भूमि पर कथित रूप से व्यावसायिक सौदे किए गए और करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक एडवांस राशि लेने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर तेजी से फैल रही हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन मामला सोशल मीडिया और चर्च समुदाय के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कब्रिस्तान की भूमि वास्तव में बेचे जाने की कोशिश की गई है तो यह केवल संपत्ति विवाद नहीं बल्कि धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। समुदाय के लोगों का आरोप है कि “जिंदा लोगों की जमीनों पर कब्जे और विवाद तो बहुत देखे, लेकिन अब मुर्दों की कब्रों तक को नहीं छोड़ा जा रहा।” लोगों का यह भी कहना है कि कब्रिस्तान जैसी धार्मिक और भावनात्मक भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि ईसाई समुदाय की आस्था पर सीधा प्रहार है।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले को लेकर चर्च के भीतर भी दो गुट आमने-सामने बताए जा रहे हैं। एक पक्ष इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इन आरोपों को चर्च की छवि खराब करने की साजिश बता रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ सामाजिक संगठनों और चर्च सदस्यों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर मामले की जांच कराने की मांग भी उठाई है।
सोशल मीडिया पर #निर्दोष_मोजेस नाम से चल रहे अभियान में कई लोग चर्च संपत्तियों के कथित दुरुपयोग और भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वायरल पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि चर्च की कई संपत्तियां पहले भी विवादों में रही हैं और अब कब्रिस्तान भूमि का मामला सामने आने से समुदाय में चिंता और बढ़ गई है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि संबंधित भूमि के कागजात, स्वामित्व और उपयोग को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई थी। कुछ लोगों का आरोप है कि धार्मिक ट्रस्ट की संपत्तियों की निगरानी में पारदर्शिता की कमी के कारण ऐसे विवाद जन्म ले रहे हैं। वहीं कई वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि कब्रिस्तान केवल जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि पूर्वजों की याद और धार्मिक आस्था का प्रतीक होता है, इसलिए उसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन या संबंधित चर्च अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यदि मामले की जांच होती है और आरोप सही पाए जाते हैं तो यह चर्च संपत्तियों के प्रबंधन और धार्मिक ट्रस्टों की जवाबदेही को लेकर बड़ा मामला बन सकता है।
✍ रिपोर्ट: एलिक सिंह
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🖋 संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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