
निवाड़ी (मध्य प्रदेश) बुंदेलखंड की माटी का गौरव अब सात समंदर पार अपनी चमक बिखेर रहा है। निवाड़ी की बेटी डॉ. प्रियंका गुप्ता ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वे वर्तमान में क्रॉप साइंटिस्ट (Crop Scientist) और वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में भारत, यूरोप, अफ्रीका और कनाडा जैसे देशों में कृषि अनुसंधान को नई दिशा दे रही हैं।
प्रारंभिक शिक्षा और संघर्ष का सफर स्वर्गीय रामसहाय गुप्ता एवं स्वर्गीय प्रेमलता गुप्ता की पुत्री एवं today india news mp के प्रधान संपादक अजय कुमार गुप्ता की छोटी बहिन डॉ. प्रियंका ने अपनी शुरुआती शिक्षा निवाड़ी के स्वामी विवेकानंद उच्च विद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षक आचार्य आत्माराम दीक्षित की प्रेरणा को दिया है। भारत से बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक और परास्नातक करने के बाद, उन्होंने इटली से गेहूं (Wheat) पर PhD की उपाधि प्राप्त की और कनाडा के प्रतिष्ठित ग्रेन रिसर्च सेंटर में पोस्टडॉक्टोरल शोध किया।
वैश्विक मंच पर बड़ी जिम्मेदारियां डॉ. प्रियंका वर्तमान में कनाडा के क्यूबेक सिटी में निवास करती हैं और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं:
- Scientific Consultant: Fernand Lambein Fund (बेल्जियम) के साथ।
- Associate Director: वर्ल्ड एग्रीकल्चर फोरम (WAF) में नीति और अनुसंधान विभाग की जिम्मेदारी।
- Board Member: बोरलॉग ट्रेनिंग फाउंडेशन में युवा वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन।
- Grasspea Initiative: वैश्विक खाद्य सुरक्षा और कृषि सहयोग को मजबूत करने में सक्रिय योगदान।
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजी गईं डॉ. प्रियंका की शैक्षणिक और शोध प्रतिभा के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है, जिनमें प्रमुख हैं:
- Women in Triticum (2025)
- Women Empowerment Award (मोरक्को दूतावास द्वारा)
- Beachell–Borlaug Scholarship और Vavilov–Frankel Fellowship।
युवाओं को संदेश: जुनून को बनाएं ताकत अब तक 22 देशों की यात्रा कर चुकीं डॉ. गुप्ता ने निवाड़ी के अपने शिक्षकों और परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अपने मार्गदर्शक डॉ. शिव अग्रवाल का विशेष धन्यवाद करते हुए युवाओं से कहा, “अपने पैशन को पहचानें और उसे सही दिशा में लगाएं। प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनकर कृषि और विज्ञान में योगदान दें, ताकि एक संतुलित भविष्य का निर्माण हो सके





