
वाराणसी नगर निगम के जोनल अधिकारी की बर्खास्तगी रद, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रक्रिया को बताया गलत
चन्दौली । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी नगर निगम के जोनल अधिकारी रामेश्वर दयाल की बर्खास्तगी आदेश को रद कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
याची पर आरोप था कि उन्होंने वाराणसी के एक घर (मकान नंबर डी 28/105) जो नगर निगम के अभिलेखों में देवोत्तर संपत्ति के रूप में दर्ज थी, उसका नामांतरण नियमों के विरुद्ध जाकर मोहम्मद जावेद और अन्य के नाम कर दिया।विभाग का तर्क था कि सेवायतों को इस सार्वजनिक संपत्ति को बेचने का अधिकार नहीं था। इसके लिए सक्षम न्यायालय की अनुमति भी नहीं ली गई थी। इसी आधार पर उन्हें 12 दिसंबर 2022 को आरोप पत्र दिया गया और जांच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।दलील दी गई कि नामांतरण की प्रक्रिया एक अर्ध न्यायिक और संक्षिप्त प्रक्रिया है, जो केवल कर वसूली के उद्देश्य से की जाती है। इससे संपत्ति के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता।
उन्होंने तर्क दिया कि संपत्ति के स्वामियों ने जिलाधिकारी की अनुमति से मूर्तियों को पहले ही लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था। इसके बाद वह निजी संपत्ति बन गई थी।
हाई कोर्ट ने कहा कि अनुशासनात्मक कार्यवाही में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता का अभाव है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक समीक्षा का उद्देश्य अपील के रूप में कार्य करना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि क्या कार्यवाही निष्पक्ष रूप से संचालित की गई थी।






