
विजय कुमार बंसल हरिद्वार ब्यूरो
सनातन हिंदू चिंतन
गोष्ठी में धर्मस्थलों के साथ-साथ सनातन को और अधिक मजबूत करने पर हुआ मंथन हरिद्वार
कांगड़ी में आयोजित सनातन हिंदू चिंतन गोष्ठी मे छाया हिंदू तीर्थ स्थलो के प्रति उदासीनता तथा अनदेखी का मुद्दा हजारों एकड़ मंदिरों की भूमि गायब होने पर हुआ मंथन प्रसिद्ध मंदिरों का सोना चांदी तथा धन आदि निधि से संबंधित चर्चा तथा सनातन के शंखनाद का बजा बिगुल महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानन्द महाराज ने कहा सनातन विश्व की सबसे पुरानी और मजबूत परंपरा है जिसका निर्वहन जब-जब इस धरती पर ईश्वर अवतरित हुए हैं उन्होंने भी किया है आज सनातन में ही सनातन का कुठारघात करने वाले लोग भी मौजूद हैं सनातन कोई संस्था या प्रथा नहीं सनातन भारत की सांसे हैं सनातन हिंदुत्व की आत्मा है सनातन खून बनकर हम सब की रगो में बहता है सनातन का किसी जाति धर्म विशेष से कोई लेना देना नहीं सनातन हर उस व्यक्ति के अंदर मौजूदहै जिसमें देश के स्वाभिमान की उमंग है जिसमें देश के प्रति सच्चा भाव है जिस में देश के लिए मर मिटने की सोच है भगवान राम ने सनातन परंपरा का निर्वहन करने के लिए पितृ आज्ञ के लिए राजपाठ का मोह छोड़कर वन जाना स्वीकार किया और भाई लक्ष्मण ने भाई प्रेम के लिए सब कुछ छोड़कर भाई के साथ वन जाना स्वीकार किया और भगवती सीता ने राज पाठ का सुख त्याग पति के साथ कदम से कदम मिलाकर वन जाना स्वीकार किया यह है सनातन और ऐसे ही कार्य हैं सनातन की आत्मा सनातन अगर कोई मकसद के लिए इस्तेमाल कर रहा है तो वह सनातन नहीं अगर भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए कोई बलिदान दे रहा है देश के लिए कोई मर मिट रहा है यह है सनातन सनातन हमारी सांसों में बसता है सनातन हमारे पहनावे में बसता है सनातन हमारे व्यवहार में बसता है और सनातन हमें देश के हर गांव हर शहर में एक दूसरे से मेलजोल में एक दूसरे के चिंता में देखने के लिए मिलता है और सनातन किसी एक धर्म विशेष की आस्था का पर्व नहीं संपूर्ण देशवासियों की आस्था का महापर्व है यह अवसर पर महंत सत्यव्रतानंद महाराज महंत स्वामी अमृतानंद महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा सनातन के मार्ग पर चलने वाले अनेकों सनातन प्रेमी गोष्ठी में उपस्थित थे






