
आज वर्ष की प्रथम 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जा रही है। यद्यपि मौनी अमावस्या का मुख्य स्नान प्रयागराज, हरिद्वार, बनारस और उज्जैन जैसी पवित्र नदियों के घाटों पर होता है, लेकिन बरसाना (जो राधा रानी की स्थली है, सहित पूरे ब्रजमंडल में भी इस दिन विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। आज बरसाना में मोनी अमावस्या के पावन अवसर पर हजारों श्रद्धांलुओं ने श्री राधे रानी के दर्शन किए
वन्दे भारत न्यूज़ /प्रवीण कुमार :
बरसाना में मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रमुख रूप से यह सब देखने को मिलता है:गहवर वन में परिक्रमा और स्नान: श्रद्धालु बरसाना के पवित्र गहवर वन की परिक्रमा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर राधा-कृष्ण के प्रेम का ध्यान करने से असीम पुण्य मिलता है।राधा रानी मंदिर में दर्शन: बरसाना स्थित श्रीजी मंदिर (लाडली जी मंदिर) में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ रहती है, जो राधा रानी के दर्शन कर मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत या पूजा-अर्चना का संकल्प लेते हैं। ब्रज में पवित्र स्नान: बरसाना और उसके आसपास के राधा कुंड, श्याम कुंड या यमुना जी के घाटों पर श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं।दान-पुण्य: इस दिन बरसाना के तीर्थ स्थलों पर जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और अन्न का दान किया जाता है।मौन व्रत: श्रद्धालु सुबह से ही मौन रहकर (बिना बोले) पूजा और स्नान करते हैं, जिसे पूरे वर्ष की तपस्या के बराबर फलदायी माना जाता है। बरसाना में मौनी अमावस्या के दिन राधा नाम की गूंज के साथ-साथ भक्त ‘मौन’ धारण कर राधा-कृष्ण की भक्ति में लीन रहते हैं और पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाते हैं।