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इलेक्शन खत्म होने के बाद भी धनबाद में फंसे हैं त्रिपुरा स्टेट राइफल कंपनी के 80 जवान, जानिए आखिर क्यों नहीं मिल रहा रिलीज ऑर्डर

चुनाव के दौरान छत्तीसगढ़ से धनबाद आए जवान अब तक लौट नहीं सके हैं. सभी जवानों को एक सरकारी स्कूल में आश्रय दिया गया है.
सरकारी स्कूल में ठहरे जवान और गाड़ी चालक
धनबाद: झारखंड चुनाव खत्म होने के बाद आज नए सरकार की ताजपोशी होने जा रही है. इन सब के बीच चुनाव ड्यूटी के दौरान छत्तीसगढ़ से धनबाद आए जवान अब भी अपने-अपने पोस्टिंग स्थान पर लौट नहीं सके हैं. सभी जवानों को धनबाद के एक सरकारी स्कूल में आश्रय दिया गया है. धनबाद में 20 नवबंर को चुनाव खत्म हो गया था, लेकिन तब से सभी जवान धनबाद में ही हैं. जवान जाने के लिए परेशान हैं, लेकिन कोई पहल अबतक नहीं की गई है. जवानों के सरकारी स्कूल में ठहरने से बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है. इलेक्शन ड्यूटी में बिहार से आए वाहन और उनके ड्राइवर भी परेशान हैं, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है.

सरकारी स्कूल में 80 जवान फंसे हुए हैं

शहर के सरायढेला के उत्क्रमित उच्च विद्यालय, जहां सुबह होते ही बच्चों की चहलकदमी रहती थी, वहां आज त्रिपुरा स्टेट राइफल कंपनी के जवानों का बसेरा बना हुआ है. कंपनी के 80 जवान यहां ठहरे हुए हैं. आठवीं और दसवीं की परीक्षा भी नजदीक आने वाली है. स्कूल प्राचार्य सुखदेव राम विभागीय दबाव के कारण कहते हैं कि बच्चों की ऑनलाइन क्लास करवा रहे हैं. कितने बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है, यह पूछने पर प्राचार्य ने कहा कि 1300 में से महज 250 बच्चे ही ऑनलाइन क्लास कर रहे हैं, क्योंकि सभी के पास एंड्रॉयड फोन नहीं है.

जानकारी देते स्कूल प्रिंसिपल और गाड़ी चालक
वहीं, इलेक्शन के लिए पांच वाहन स्कूल परिसर में लगे हुए हैं. सभी गाड़ियां बिहार शरीफ की है. वाहन ड्राइवर महेश दास ने कहा कि इलेक्शन खत्म होने के बाद हमें वापस जाना था, लेकिन हमें जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है. हमें यहां खाना खाने में परेशानी हो रही है. हमारे पास पैसे नहीं हैं. पुलिस लाइन में पैसा मांगने के लिए जाते हैं तो कहते हैं इलेक्शन खत्म हो गया है, अब पैसा नहीं है. हम अपने वाहन को यहां छोड़कर नहीं जा सकते हैं. हमारे घर में क्या स्थिति है, यह कोई देखने वाला नहीं है.

जवानों को अब तक नहीं मिला रिलीज ऑर्डर

त्रिपुरा स्टेट राइफल के सूबेदार परशुराम देव वर्मा ने बताया कि ट्रेन नहीं मिलने के कारण हमारे जवानों को यहां रहना पड़ रहा है. कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि प्रशासन की तरफ से खाना भी मुहैया नहीं कराया जा रहा है. खुद के पैसों से खाना पड़ रहा है. जब हमलोग इलेक्शन ड्यूटी में निकले थे तो उस वक्त ठंड नहीं थी लेकिन अब ठंड बढ़ गई तो परेशानी हो रही है. सूबेदार परशुराम देव ने बताया कि हमारी कंपनी के जवानों को पहले बैंक मोड़ के एक प्राइवेट स्कूल में ठहराया गया था. 20 को इलेक्शन खत्म होने के बाद प्रशासन ने सभी जवानों को कोलकुसमा के सरकारी स्कूल में शिफ्ट कराया गया है.

स्कूल में जवानों के ठहरने से बच्चों की पढ़ाई बाधित

असम स्टेट राइफल के एक जवान नीरज कुमार सिंह ने बताया कि उनकी भतीजी की शादी थी. इलेक्शन खत्म होने के बाद भतीजी की शादी की तारीख रखी गई थी ताकि शादी में शामिल हो सके. इसके लिए हमने कंपनी से 11 दिन की छुट्टी भी स्वीकृत करवा ली थी. छुट्टी स्वीकृत होने के बाद भी यहां से नहीं जा सके. इस पूरे मामले को लेकर जिले के एसएसपी एचपी जनार्दनन ने कहा कि अभी तक आदेश नहीं आया है. जिले में कुछ अन्य फोर्स भी हैं, जिनके रिलीज ऑर्डर अब तक नहीं आए हैं. वहीं, बच्चों की पढ़ाई बाधित होने के सवाल पर बात पर उन्होंने कहा कि इस पर क्या करना है, देखते हैं. बता दें कि छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला के कुसमुंडा में त्रिपुरा स्टेट राइफल की कंपनी का हेडक्वार्टर है. नियम के अनुसार इलेक्शन ड्यूटी खत्म करने के बाद सभी जवानों को हेडक्वार्टर में रिपोर्ट करना पड़ता है. उसके बाद ही जवान कहीं जा सकते हैं.

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