
🔴 उत्तर प्रदेश में “कानून-व्यवस्था” का पहला दिन और पहली ही झलक: बिजनौर में नाबालिग बच्ची को चाकू की नोक पर बनाया बंधक, दहशत में रहा इलाका
बिजनौर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावों के बीच ज़मीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बिजनौर ज़िले से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यहां एक सनकी व्यक्ति ने एक नाबालिग बच्ची को दुकान के अंदर चाकू की नोक पर बंधक बना लिया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी अजीत बाल गोविंद अचानक दुकान में घुसा और वहां मौजूद नाबालिग बच्ची को पकड़कर चाकू तान दिया। बच्ची की चीख-पुकार और घबराहट से आसपास के लोग सन्न रह गए। आरोपी न केवल बच्ची को डराता रहा, बल्कि अजीब और बेहूदा मांगें भी करता रहा। इस दौरान बच्ची की हालत बेहद भयावह थी, जिसे देख हर किसी का कलेजा कांप उठा।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन हालात इतने संवेदनशील थे कि एक छोटी सी चूक भी बच्ची की जान पर भारी पड़ सकती थी। काफी देर तक चली मशक्कत और रणनीति के बाद पुलिस ने किसी तरह बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। इसके बाद आरोपी को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया।
हालांकि बच्ची को सकुशल बचा लिया गया, लेकिन यह घटना कई बड़े सवाल छोड़ गई है। सबसे अहम सवाल यह है कि जब दिनदहाड़े एक नाबालिग बच्ची को खुलेआम बंधक बनाया जा सकता है, तो आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करे? क्या कानून-व्यवस्था सिर्फ कागज़ों और मंचों तक ही सीमित रह गई है?
स्थानीय लोगों में घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस कार्रवाई न करती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। साथ ही यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि क्षेत्र में पहले से ही असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ी हुई थीं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर नए सिरे से सख्ती और सुधार के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन बिजनौर की यह तस्वीर उन दावों की पहली ही परीक्षा में पोल खोलती नजर आ रही है। महिला और बाल सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावे भी इस घटना के बाद खोखले प्रतीत हो रहे हैं।
फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके मानसिक हालात व आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की जा रही है। वहीं, बच्ची को काउंसलिंग और चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
इस सनसनीखेज घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कानून-व्यवस्था के असली हालात क्या हैं और जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़, सहारनपुर
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