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करैल पर तेरह हजार की रिकवरी 

- एफ आई आर को लेकर असमंजस -

सीधी। फर्जी जॉब कार्ड बनाकर मजदूरी आहरण को लेकर की गई शिकायत पर जनपद पंचायत द्वारा गठित जांच दल ने घोटाले पर मुहर लगाते हुए तेरह हजार रुपए के रिकवरी की अनुशंसा की है।

हालांकि जांच प्रतिवेदन की कॉपी फिलहाल हमें उपलब्ध नहीं हो पाई है लेकिन जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा द्वारा इसकी पुष्टि की गई है। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत करैल जनपद पंचायत कुसमी में फर्जी जॉब कार्ड बनाकर लाखों रुपए की राशि आहरण किए जाने की शिकायत किए जाने पर जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से की गई जिसमें बताया गया कि रमाशंकर, भुवनेश्वर, शिव प्रसाद, इंद्रजीत, सियावती, उमाशंकर, ममता, रंगलाल और पार्वती के नाम पर एक से अधिक क्या कार्ड बनाकर एक ही व्यक्ति को एक ही काम में कई बार करना लेख किया गया है या फिर एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग कार्यों में एक ही समय में काम करता हुआ दिखाया गया है। शिकायत के बाद जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा पत्र क्रमांक 2744 दिनांक 18 दिसंबर 2025 के माध्यम से चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया जिसे जांच प्रतिवेदन अब सामने आया है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा के मुताबिक जांच कमेटी ने लगभग 13000 रुपए के रिकवरी की अनुशंसा की है। इस मामले में क्या एफ आई आर कराई जाएगी इस सवाल का उन्होंने फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है। यह अवश्य कहा है कि जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्रतिवेदन जिला पंचायत को भेजा जाएगा जहां से आगे की कार्यवाही की जाएगी हालांकि जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने फिर के सवाल पर मोहर लगाई है। हालांकि यह संपूर्ण जांच नहीं है बल्कि अभी भी श्रीपाल, गीता, सोभनाथ, रामकली, शिवरतन, प्रेमलाल पिता बबन, प्रेमलाल पिता बाबूलाल ,सूरज लाल पिता मोती, सूरज लाल पिता बाबूलाल, बाबूलाल, फूलचंद, गुलजार, विजय, राजभान, सुखदेव ,भैयालाल,छोटेलाल ,बब्बी और प्रेमलाल पिता तिलकधारी सहित सैकड़ो फर्जी जॉब कार्डों की जांच अभी लंबित है जिनके सामने आने के बाद रिकवरी की रकम में इजाफा होना तय हैं।

 

एफ आई आर क्यों जरूरी -इस मामले में एक बड़ा सवाल सामने आया है कि क्या गबन किए गए राशि की रिकवरी हो जाने से अपराध कम हो जाता है जिसका सीधा जवाब है नहीं और इस तरह के मामले में माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय भी इसी पक्ष में सामने आए हैं।

1- ऐसे ही एक मामले में पंचायत सचिव राजेंद्र सिंह पर प्रशासन में रिकवरी के साथ-साथ एफ आई आर भी करा दी जिस पर राजेंद्र सिंह ने उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में रिट पिटीशन दायर कर फिर को रद्द करने की मांग की इस पर 27 फरवरी 2025 को दिए अपने फैसले में विद्वान न्यायाधीश जी एस अहलूवालिया ने कहां है कि- ” यदि शिकायत दस्तावेज और रिकॉर्ड देखने से प्रथम दृष्टि अपराध बनता है तो केवल इस आधार पर कि आरोपी स्वयं को निर्दोष बता रहा है फिर को रद्द नहीं किया जा सकता इसलिए इन पर आईपीसी की धारा 409 420 467 468 और 120 पी के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए, और इन्हें ट्रायल कोर्ट में अपने बचाव से संबंधित साक्षी प्रस्तुत कर खुद को निर्दोष साबित करना चाहिए।”

2- ऐसे ही एक दूसरे प्रकरण में ग्राम पंचायत खजुरिहा बरामदगरी जिला रायसेन के पंचायत सचिव शिव शंकर मिश्रा पर रिकवरी के साथ जब फिर दर्ज कराई गई तो वे भी हाईकोर्ट पहुंचे जहां समूचे मामले को विभागीय मामला और विभागी जांच की बात कहते हुए फिर को रद्द किए जाने की मांग की जहां पर वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमथ और विद्वान न्यायाधीश विशाल मिश्रा की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए अपने फैसले में कहा कि- ” मनरेगा गरीब ग्रामीणों को रोजगार देने की योजना है, यदि कोई अधिकारी या पंचायत कर्मचारी फर्जी जॉब कार्ड बनाकर मजदूरी निकलता है तो यह सार्वजनिक धन के साथ धोखाधड़ी है। यह सिर्फ प्रशासनिक गलती नहीं बल्कि आपराधिक कृत्य है। पंचायत सचिव पंचायत राज व्यवस्था का महत्वपूर्ण पद है और यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सीधे शामिल रहता है इसलिए उसे लोक सेवक माना जाएगा। इसलिए उस पर भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार से जुड़े कानून लागू होते हैं। ऐसे में फिर को रद्द किए जाने का आदेश नहीं दिया जा सकता है।”

अब सवाल यह उठता है कि क्या सीधी जिला प्रशासन करैल में पदस्थ रोजगार सहायक सह प्रभारी सचिव शिव प्रसाद यादव के अपराधों की पुष्टि होने के बाद कानून की मॅसा और माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक एफ आई आर करता है या फिर केवल रिकवरी तक सीमित रहता है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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