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कस्तूरी बेकर्स का ‘कड़वा’ सच: नाम बड़े और दर्शन खोटे, ग्राहकों की सेहत से सरेआम खिलवाड़!

सावधान! कस्तूरी बेकर्स में परोसा जा रहा 'बीमारी का पैकेट', बासी छोले-भटूरे ने खोली पोल। कस्तूरी बेकर्स की दबंगई: सड़ा हुआ खाना खिलाया और शिकायत पर दिखाई हेकड़ी!

अजीत मिश्रा (खोजी)

🥗कस्तूरी बेकर्स के ‘जायके’ में मिला लापरवाही का जहर: नाम बड़े और दर्शन खोटे!🥗

🥣संतकबीरनगर में खाद्य विभाग की नींद का फायदा उठा रहा कस्तूरी बेकर्स, बासी खाने का काला खेल शुरू।

🥣क्या कस्तूरी बेकर्स को मिल गई है जहर परोसने की छूट? सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, विभाग मौन।

खलीलाबाद, संतकबीरनगर।। शहर के तथाकथित प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट ‘कस्तूरी बेकर्स’ की चमक-धमक के पीछे परोसे जा रहे बासी खाने का काला सच सामने आया है। गुणवत्ता का दम भरने वाले इस संस्थान ने न केवल एक ग्राहक की सेहत के साथ खिलवाड़ किया, बल्कि शिकायत करने पर अपनी गलती सुधारने के बजाय अड़ियल रवैया अपनाकर अपनी नैतिकता की भी पोल खोल दी।

💫मामला: पैसे पूरे, खाना सड़ा हुआ!

जानकारी के मुताबिक, एक ग्राहक ने कस्तूरी बेकर्स से बड़े भरोसे के साथ ‘छोला-भटूरा’ पार्सल कराया था। लेकिन घर जाते ही जैसे ही पैकेट खुला, खाने की दुर्गंध ने पूरे कमरे को भर दिया। छोले का स्वाद कड़वा और पूरी तरह बासी था। सवाल यह उठता है कि क्या कस्तूरी बेकर्स जैसे नामी संस्थान अब ग्राहकों की जेब काटने के साथ-साथ उनके लीवर और किडनी से भी खेलने का लाइसेंस ले चुके हैं?

💫मैनेजमेंट की तानाशाही: गलती पर माफी नहीं, दिखा रहे हेकड़ी

इस पूरे प्रकरण में सबसे शर्मनाक पहलू रेस्टोरेंट प्रबंधन का व्यवहार रहा। जब पीड़ित ग्राहक ने खराब खाने की शिकायत की, तो प्रबंधन ने जिम्मेदारी लेने के बजाय मामले को रफा-दफा करने और टालने की कोशिश की। संतोषजनक जवाब देने के बजाय स्टाफ का बेरुखा व्यवहार यह साबित करता है कि इन्हें सिर्फ मुनाफे से सरोकार है, ग्राहकों की जान और सेहत से नहीं।

“हम भारी कीमत चुकाकर ताजा भोजन की उम्मीद करते हैं, लेकिन शहर के इतने बड़े रेस्टोरेंट में अगर सड़ा हुआ खाना परोसा जाएगा, तो आम आदमी कहां जाएगा?” — आक्रोशित ग्राहक

🔥सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, विभाग मौन क्यों?

घटना के बाद से सोशल मीडिया पर इस लापरवाही का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। नेटिजन्स कस्तूरी बेकर्स की कार्यप्रणाली पर थू-थू कर रहे हैं। बड़ा सवाल खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) पर भी खड़ा होता है— क्या विभाग की टीम केवल त्यौहारों पर जागती है? क्या शहर के इन ‘बड़े नामों’ को बासी खाना खिलाने की खुली छूट दे दी गई है?

जवाबदेही किसकी?

🔥क्या कस्तूरी बेकर्स को बासी खाना परोसने का लाइसेंस मिला है? शहर के इतने बड़े संस्थान में सड़ा हुआ भोजन मिलना क्या विभाग की नियमित चेकिंग की पोल नहीं खोलता?

🔥क्या विभाग केवल त्यौहारों का इंतजार करता है? अधिकारी केवल दीपावली या होली पर ही सैंपलिंग क्यों करते हैं? क्या आम दिनों में जनता की सेहत की कोई कीमत नहीं है?

🔥कस्तूरी बेकर्स पर मेहरबानी क्यों? सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और भारी जनाक्रोश के बावजूद, खबर लिखे जाने तक विभाग ने रेस्टोरेंट के किचन की जांच और सैंपलिंग क्यों नहीं की?

🔥अड़ियल प्रबंधन पर कार्रवाई कब? जब संस्थान अपनी गलती मानने के बजाय ग्राहक से बदतमीजी कर रहा है, तो क्या प्रशासन ऐसे बेलगाम संचालकों का लाइसेंस रद्द करने की हिम्मत दिखाएगा?

🔥जनता के भरोसे का क्या? लोग नाम और ब्रांड देखकर जाते हैं, लेकिन अगर वहां भी ‘जहर’ परोसा जा रहा है, तो खाद्य सुरक्षा विभाग की सार्थकता क्या रह जाती है?

सावधान रहें! अगर आप भी कस्तूरी बेकर्स के नाम पर यहां का रुख कर रहे हैं, तो जरा संभल जाइए। क्योंकि यहाँ पैसे आपके लग रहे हैं, लेकिन सेहत दांव पर लगी है।

ब्यूरो रिपोर्ट: मंडल ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल (उ.प्र.)

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