
कुशीनगर । 29 अगस्त 1994… जन्माष्टमी की रात, जब कान्हा के जन्मोत्सव की खुशियां मनाने की तैयारी थी, तभी अंधेरे में गूंजे गोलियों के शोर ने पूरे कुशीनगर को गम के सागर में डुबो दिया।
तरेया थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल पांडे, कुबेरनाथ थाना के थानाध्यक्ष राजेंद्र यादव, बहादुर नाविक भूखल, और उनके साथ कई पुलिस के जवान उस रात चोरों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए।
उस खून से सनी जन्माष्टमी ने पुलिस महकमे के दिल में ऐसा घाव दिया कि अगले 31 वर्षों तक पुलिस लाइन में यह त्योहार नहीं मनाया गया।
यह दिन कुशीनगर पुलिस के इतिहास में ‘काले अध्याय’ के रूप में दर्ज हो गया।
31 साल बाद इतिहास बदलेगा
पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिंह की पहल पर इस वर्ष पुलिस लाइन में जन्माष्टमी का भव्य आयोजन होगा।
भजन-कीर्तन, दही-हांडी, श्रीकृष्ण झांकी और आरती से पूरा माहौल गूंजेगा।
पुलिसकर्मी, उनके परिवार और आम नागरिक एक साथ कान्हा के जन्मोत्सव की खुशियां मनाएंगे।
क्यों थी 1994 की जन्माष्टमी खामोश
चोरों की तलाश में पुलिस की दो टीमें रवाना हुईं। एक टीम बिना सुराग लौटी, दूसरी टीम ने नदी के किनारे नाव से भाग रहे बदमाशों को घेर लिया।
बदमाशों ने गोलियां बरसाईं, जिसमें थानाध्यक्ष अनिल पांडे, थानाध्यक्ष राजेंद्र यादव, नाविक भूखल सहित कई जवान शहीद हो गए।
उसी रात से पुलिस लाइन में जन्माष्टमी का उत्सव बंद कर दिया गया।
एसपी का संदेश
“यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारे शहीद साथियों की बहादुरी को सलाम और आने वाली पीढ़ियों को साहस का सबक है।” – संतोष कुमार मिश्रा, पुलिस अधीक्षक कुशीनगर
वंदे भारत न्यूज से मान्धाता कुशवाहा

















