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“खंड शिक्षा अधिकारी की नाक के नीचे चल रहा अवैध शिक्षा का धंधा, जिम्मेदार साधे हुए हैं चुप्पी।”

"कठार जंगल स्थित वह विद्यालय, जहाँ कागज़ों पर प्राइमरी और हकीकत में चल रहा है इंटर कॉलेज।"

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। भविष्य से खिलवाड़: कप्तानगंज में ‘मान्यता’ का खेल, बेसमेंट में कैद मासूमों का कल।।

मंगलवार 27 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

बस्ती। जिले में शिक्षा माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि प्रशासन की नाक के नीचे ‘अवैध’ शिक्षा का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। ताजा मामला कप्तानगंज विकासखंड के कठार जंगल का है, जहां एक विद्यालय शिक्षा के नाम पर न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि मासूम बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है।

🔥प्राइमरी की आड़ में ‘हायर सेकेंडरी’ का मायाजाल

सूत्रों की मानें तो इस विद्यालय के पास मान्यता केवल कक्षा 5 (प्राइमरी) तक की है, लेकिन साहब की रसूख देखिए—यहाँ पढ़ाई हायर सेकेंडरी तक कराई जा रही है। सवाल यह है कि जो बच्चे यहाँ कक्षा 5 के ऊपर पढ़ रहे हैं, उनकी मार्कशीट और भविष्य का आधार क्या होगा? क्या यह सीधे तौर पर अभिभावकों की आंखों में धूल झोंकना नहीं है?

🔥मौत का कुआं या क्लासरूम? बेसमेंट में चल रही कक्षाएं

हैरानी की बात तो यह है कि यह स्कूल न केवल कागजों में फर्जीवाड़ा कर रहा है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को भी ताक पर रख दिया गया है। स्कूल की कक्षाएं बेसमेंट में संचालित हो रही हैं। किसी भी अनहोनी की स्थिति में इन मासूमों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन होगा? क्या जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

🔥जिम्मेदार मौन: ‘विटामिन M’ या गहरी नींद?

खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कप्तानगंज के कार्यालय से चंद दूरी पर यह गोरखधंधा चल रहा है, फिर भी उनकी ‘सक्रियता’ पर सवालिया निशान उठना लाजिमी है।

😇क्या अधिकारियों को इसकी भनक नहीं है?

👉या फिर ‘विटामिन M’ (पैसा) के कमाल ने सिस्टम की आंखों पर पट्टी बांध दी है?

👉शिकायत बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) तक पहुंच चुकी है, लेकिन अब देखना यह है कि बाबा का हंटर इन शिक्षा माफियाओं पर चलेगा या मामले की ‘लीपापोती’ कर दी जाएगी।

🔥सावधान अभिभावक!

अगर आपका बच्चा भी इस विद्यालय में कक्षा 5 से ऊपर की शिक्षा ले रहा है, तो संभल जाइए। आपका पैसा और बच्चे का कीमती साल, दोनों बर्बाद होने की कगार पर हैं। जिला प्रशासन की चुप्पी कहीं आपके बच्चे के भविष्य पर भारी न पड़ जाए।

बड़ा सवाल: क्या बीएसए बस्ती इस फर्जीवाड़े पर कड़ा एक्शन लेंगे, या कठार जंगल का यह ‘अवैध किला’ यूं ही मासूमों के भविष्य से खेलता रहेगा?

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