
अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨गीडा पुलिस की ‘अंधेर नगरी’: खाकी के ‘कवच’ में खनन का काला कारोबार🚨
⭐सिस्टम की ‘मिट्टी’ पलीद: चिलुआताल का मोनोग्राम और गीडा की चुप्पी, आखिर किसका है यह खेल?
⭐रात के अंधेरे में ‘सरकारी’ डंपर? सड़कों को मलबे में तब्दील कर रहा अवैध खनन का सिंडिकेट।
उत्तर प्रदेश।
गोरखपुर।। कहने को तो गोरखपुर का गीडा क्षेत्र औद्योगिक विकास का केंद्र है, लेकिन इन दिनों यहाँ ‘अवैध खनन का विकास’ अपनी चरम सीमा पर है। ताज्जुब की बात यह है कि जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहाँ मिट्टी लदे दर्जनों भारी-भरकम डंपर पुलिस की नाक के नीचे से रात भर फर्राटा भर रहे हैं। और गीडा पुलिस? उसे तो जैसे ‘भनक’ तक नहीं है।
⭐खाकी का मोनोग्राम या ‘अवैध वसूली’ का लाइसेंस?
हैरानी तब होती है जब इन डंपरों पर ‘थाना चिलुआताल/जमुआड़’ का मोनोग्राम लगा दिखाई देता है। डंपर चालक रामगोपाल (UP 53 T 9666) का सीना ठोककर यह कहना कि “कागज थाने में जमा हैं और मोनोग्राम वहीं से मिला है”, यह साफ करता है कि यह खेल अकेले खनन माफिया का नहीं है। सवाल यह है कि क्या अब थानों से विकास कार्यों के बजाय अवैध खनन की ‘पर्ची’ कट रही है? क्या पुलिस का मोनोग्राम अब सड़कों पर कानून तोड़ने का ‘वीआईपी पास’ बन गया है?
⭐विकास की राह पर ‘विनाश’ के डंपर
हाईवे से खजनी रोड को जोड़ने वाला बरहुआ लिंक रोड आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक चलने वाली इस ‘अवैध एक्सप्रेस’ ने स्थानीय निवासियों शैलेश सिंह और मनोज यादव की रातों की नींद हराम कर दी है। भारी लोड के चलते सड़कें पाताल में धंस रही हैं, लेकिन प्रशासन की फाइलें अभी भी मेज पर ही तैर रही हैं।
⭐’साहब’ को जानकारी नहीं, या जानना नहीं चाहते?
जब गीडा थाना प्रभारी अश्वनी पांडेय से इस बाबत पूछा गया, तो उनका रटा-रटाया जवाब था— “जानकारी नहीं है, दिखवाते हैं।” साहब की यह ‘अनभिज्ञता’ अपने आप में एक बड़ा सवाल है। जिस इलाके की सुरक्षा का जिम्मा उनके कंधों पर है, वहाँ दर्जनों डंपर पूरी रात शोर मचाते हुए सड़कें तोड़ रहे हैं और पुलिस को खबर तक नहीं? यह या तो पुलिस की भारी विफलता है या फिर ‘मौन स्वीकृति’।
💫 सवाल:
👉क्या चिलुआताल पुलिस ने डंपरों को मोनोग्राम बांटने की नई स्कीम शुरू की है?
👉अगर डंपर चिलुआताल के हैं, तो गीडा क्षेत्र में उनकी धमाचौकड़ी पर गीडा पुलिस की चुप्पी का ‘रेट’ क्या है?
👉क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का पैसा क्या उन डंपर मालिकों की जेब से वसूला जाएगा?पुलिस मोनोग्राम का खेल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दर्जनों डंपरों पर चिलुआताल थाने (जमुआड़) का मोनोग्राम लगा हुआ है। चालक का दावा है कि उन्होंने थाने में कागज़ जमा किए हैं और वहीं से यह मोनोग्राम मिला है, जो अवैध कार्यों को ‘संरक्षण’ देने का संकेत देता है।
💫 स्थानीय बुनियादी ढांचे का नुकसान
मिट्टी लदे इन भारी डंपरों के कारण बरहुआ लिंक रोड (जो हाईवे को खजनी रोड से जोड़ता है) पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। स्थानीय निवासी शैलेश सिंह और मनोज यादव के अनुसार, रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक चलने वाले इन डंपरों ने सड़क की हालत बदतर कर दी है।
💫 जिम्मेदारों का जवाब
👉डंपर चालक (रामगोपाल): स्वीकार किया कि खनन चिलुआताल क्षेत्र में हो रहा है, लेकिन गीडा क्षेत्र में डंपर चलाने के परमिट पर चुप्पी साध ली।
👉गीडा थाना प्रभारी (अश्वनी पांडेय): उन्होंने इस मामले से पूरी तरह अनभिज्ञता जताई है और मामले की जांच कराने की बात कही है।
💫वर्दी की साख पर बट्टा: “जब रक्षक ही भक्षक के साथ ‘मोनोग्राम’ बांटने लगे, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे? डंपर चालक का यह दावा कि मोनोग्राम थाने से मिला है, सीधे तौर पर पुलिस महकमे की ईमानदारी को कटघरे में खड़ा करता है।”
💫अंधेरगर्दी का आलम: “रात 10 से सुबह 8 बजे तक का समय शायद गीडा पुलिस के लिए ‘कर्फ्यू’ का नहीं, बल्कि ‘आंखें मूंदने’ का समय बन गया है। लिंक रोड की बदहाली चीख-चीख कर गवाही दे रही है कि यहाँ कानून का राज नहीं, बल्कि डंपर माफिया का सिक्का चलता है।”
💫प्रशासनिक सुस्ती पर कटाक्ष: “थाना प्रभारी का ‘जानकारी नहीं है’ वाला बयान किसी चुटकुले से कम नहीं लगता। जिस सड़क से पूरी रात दर्जनों भारी वाहन गुजरें और पुलिस को खबर न हो, यह या तो अक्षमता की पराकाष्ठा है या फिर गहरे भ्रष्टाचार का संकेत।”
जनता देख रही है कि कैसे नियम-कानूनों की मिट्टी खोदकर माफिया और चंद रसूखदार अपनी जेबें भर रहे हैं। अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी इस ‘मोनोग्राम वाली सांठगांठ’ पर कब बुलडोजर चलाते हैं।



















