
अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी पर दाग: पुरानी बस्ती पुलिस की ‘डीजल वाली डील’, क्या ‘बखरा’ लेकर बिक गया कानून?
मंगलवार 27 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
बस्ती।। जिले में रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं और खाकी की ओट में वसूली का खेल खेला जाने लगे, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र की हंडिया चौकी एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन अपनी बहादुरी के लिए नहीं, बल्कि ‘सेटिंग-गेटिंग’ और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के लिए। चर्चा है कि डीजल चोरी के मामले में पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के बजाय ‘बखरा’ (हिस्सा) लेकर उन्हें सुरक्षित रास्ता दे दिया।
💫न रवानगी, न सूचना: खलीलाबाद में क्या गुल खिला रही थी पुलिस?
मामला 19 जनवरी का है, जब हाईवे किनारे खड़े ट्रकों से 800 लीटर डीजल चोरी करने के आरोप में विवेक और विपिन पासवान को जेल भेजा गया। असली खेल शुरू हुआ पूछताछ के बाद। आरोपियों ने कबूल किया कि चोरी का डीजल गोरखपुर निवासी उदय यादव के पास है।
नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए, 21 जनवरी को SI संजय कुमार और हेड कांस्टेबल वीरेंद्र यादव बिना किसी रवानगी (GD एंट्री) और बिना उच्चाधिकारियों को सूचना दिए पड़ोसी जिले संतकबीरनगर के खलीलाबाद जा पहुंचे। सवाल यह है कि बिना सरकारी अनुमति के पुलिस टीम दूसरे जिले की सीमा में क्या कर रही थी? क्या यह दबिश थी या वसूली की कोई गुप्त मीटिंग?
💫50 हजार में ईमान का सौदा?
सूत्रों की मानें तो पुलिस ने तीसरे आरोपी उदय यादव को गोरखपुर से खलीलाबाद बुलवाया। उसे सलाखों के पीछे भेजने के बजाय, 50 हजार रुपये की ‘डील’ हुई और आरोपी को वहीं से रफूचक्कर कर दिया गया। डीजल बरामदगी और मुख्य सरगना की गिरफ्तारी के बजाय जेब गर्म करना पुलिस को ज्यादा मुनासिब लगा।
बड़ा सवाल: अगर दरोगा और सिपाही के मोबाइल लोकेशन की बारीकी से जांच हो, तो खलीलाबाद जाने का कच्चा चिट्ठा खुल जाएगा। क्या जिम्मेदार अधिकारी लोकेशन निकलवाने की जहमत उठाएंगे?
💫पुरानी बस्ती: दागदार रहा है इतिहास
यह पहला मौका नहीं है जब पुरानी बस्ती पुलिस की साख पर बट्टा लगा हो। इससे पहले भी इस थाने के दरोगा और सिपाही भ्रष्टाचार के मामलों में रंगे हाथों पकड़े जा चुके हैं और जेल की हवा खा चुके हैं। बावजूद इसके, महकमे में सुधार के बजाय ‘वसूली तंत्र’ और मजबूत होता दिख रहा है।
💫खामोश जिम्मेदार, सवालों में वर्दी
इस पूरे प्रकरण ने बस्ती पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है:
👉बिना एंट्री के सरकारी सीमा लांघने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
👉क्या डीजल चोरी के बड़े सिंडिकेट को बचाने के लिए यह ‘डील’ की गई?
👉क्या उच्चाधिकारी इस बार भी मामले को ठंडे बस्ते में डाल देंगे?
वर्दी पर लगे इस कीचड़ को साफ किया जाएगा या फिर रसूख और पैसों के दम पर सच को दबा दिया जाएगा? जनता की नजर अब कप्तान साहब की कार्रवाई पर टिकी है।















