A2Z सभी खबर सभी जिले की

खेतों में फसल नहीं, संकट लहलहा रहा है!

हाटा में आवारा गोवंश और नीलगायों से जूझते किसान

खेतों में फसल नहीं, संकट लहलहा रहा है!

हाटा में आवारा गोवंश और नीलगायों से जूझते किसान

हाटा कुशीनगर हाटा क्षेत्र में इन दिनों खेतों की तस्वीर बदल चुकी है।
जहाँ कभी सरसों की पीली बालियाँ लहराती थीं,
वहाँ अब आवारा गोवंश और नीलगायों के झुंड किसानों की मेहनत को रौंदते नजर आ रहे हैं।

किसान दिन-रात खेतों की सिंचाई कर रहे हैं,
बीज से लेकर फसल तैयार होने तक हर पल पसीना बहा रहे हैं,
लेकिन कुछ ही मिनटों में
आवारा पशु उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दे रहे हैं।

स्थिति यह है कि जैसे ही खेतों में गोवंशों का झुंड घुसता है,
किसान लाठी-डंडे लेकर खेतों की ओर दौड़ते हैं
पशु भगाए तो जाते हैं,
लेकिन थोड़ी ही देर में
वे फिर लौट आते हैं—
और साथ में लौट आती है किसानों की चिंता।

यह समस्या अब किसी एक गांव तक सीमित नहीं रही।
भिस्वा बाजार, पोखरभिंडा, सेमरी परसौनी, देवराज पिपरा, सुकरौली और लंगड़ी
सहित कई गांवों में
फसलें लगातार आवारा पशुओं का शिकार बन रही हैं।

क्षेत्र के किसान
अनिरुद्ध मिश्र, ब्रम्हा मल्ल, धनेश,
जगदीश चौहान और परमार्थ यादव जैसे कई लोगों ने
इस हालात पर गहरी चिंता जताई है।

किसानों का कहना है कि
पूर्ववर्ती सरकारों के समय ऐसी नौबत नहीं आई थी।
उनका आरोप है कि
गोवंश वध को अपराध घोषित किए जाने के बाद
आवारा पशुओं की संख्या में तेज़ी से इज़ाफा हुआ है,
जिसका सीधा असर अब खेती पर पड़ रहा है।

किसानों की मांग साफ है—
गांवों में भी शहरों की तरह
गोवंशों के ठहराव और चारे की समुचित व्यवस्था की जाए।
इसके लिए प्रधान, कोटेदार और लेखपाल को
जिम्मेदारी सौंपी जाए।

किसानों का कहना है कि
अगर समय रहते इस समस्या पर
ठोस और व्यावहारिक कदम नहीं उठाए गए,
तो आने वाले दिनों में
खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा
और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

Back to top button
error: Content is protected !!